फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहादत से बड़ी हो गई एक दिन की छुट्टी

Thu, 17 Dec 2015 12:43 AM IST
अमर उजाला, उन्नाव
विज्ञापन
विज्ञापन
सरहद पर देश के दुश्मनों से मोर्चा लेते हुए जान गवांने वाले वीर सपूतों की शहादत अधिकारियों के लिए एक दिन की छुट्टी से भी छोटी हो गई। छुट्टी मिलने पर आराम के चक्कर में अधिकारी विजय दिवस को मनाना भूल गए। जिले के सैनिकों व उनके परिवार की सुध रखने वाले एकमात्र विभाग सैनिक कल्याण व पुनर्वास केंद्र के अधिकारियों ने इस दिन विभाग में शहीदों की याद में बने स्मारक पर फूल चढ़ाने तक नहीं पहुंचे। वहीं अधिकारी ने इस दिन छुट्टी पड़ जाने के कारण आगे कार्यक्रम करवाने की बात कही।
विज्ञापन

करीब 44 साल पहले आज ही के दिन 16 दिसंबर 1971 को भारत व पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस ऐतिहासिक जीत दर्ज में देश के जवानों ने दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए पाकिस्तान के करीब 90 हजार सैनिकों को खदेड़ दिया था। इस युद्ध के दौरान भारतीय सेना में राजपूत रेजीमेंट के सिपाही उन्नाव जिले के रामबालक मिश्रा व ग्रेनेडियर रेजीमेंट में हवलदार अफजल अलीम वारसी ने अपनी शहादत दी थी। वहीं जिले के ही दो अन्य जांबाज सैनिक गोरखा राइफल में मेजर जेके पंत और कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार उदय प्रताप सिंह युद्ध लड़ते हुए अपंग हो गए थे। देश पर कुर्बानी देने वाले इन जवानों की याद में बने स्मारक पर दो फूल चढ़ाने भी सैनिक कल्याण विभाग का कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा।


मेन गेट व कार्यालय में लटकता रहा ताला
वजय दिवस के अवसर पर सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र के मेन गेट पर ताला लटकता रहा। वहीं केंद्र के भीतर बने स्मारक की साफ-सफाई भी नहीं की गई। अफसर व कर्मचारियों के ऑफिस भी बंद रहे। किसी को देश की सुरक्षा में दी गई शहादत की सुध नहीं आई।
विज्ञापन


कोट
मैं तो ऑफिस आ रही थी, लेकिन छुट्टी का पता चला तो रास्ते से लौट गई। विजय दिवस के दिन अवकाश होने के कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका। इसे लेकर आने वाले दिनों में कार्यक्रम जरूर आयोजित किया जाएगा। मधु मिश्रा, सैनिक कल्याण अधिकारी-उन्नाव।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें