उन्नाव। बांगरमऊ क्षेत्र में एचआईवी पीड़िताें को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। लोग इसे छुआछूत की बीमारी मानकर दूरियां बना रहे हैं। स्थिति यह ैह कि स्कूल में पढ़ने वाली बच्ची के साथ उसके दोस्तों ने बैठने से इनकार कर दिया। हालांकि अध्यापक बच्चों की काउंसलिंग कर रहे हैं। सीएमओ डा. एसपी चौधरी ने कहा कि साथ बैठने से एचआईवी नहीं फैलता है।
बांगरमऊ कस्बे के मोहल्ला प्रेमगंज व तहसील इलाके के गांव चकमीरापुर, किरविदियापुर में जनवरी माह में एचआईवी के 38 मामले सामने आए हैं। इनमें 6 बच्चे भी शामिल हैं। एचआईवी पीड़ित बच्चे गांव के ही स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। एक साथ बड़ी संख्या में मामले सामने आने पर रोगियों की पहचान आम हो गई है। लोग एचआईवी पीड़िताें को पहचान गए हैं। गांव में शिक्षा का स्तर नीचे है। लोगों को एचआईवी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
अधिकतर लोग इसे छूत की बीमारी मानते हैं। गुरुवार को बांगरमऊ तहसील इलाके के एक गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय में सात साल की बच्ची को अलग बैठाना पड़ा। पूछने पर बच्ची ने मासूमियत से बताया कि साथी कहते हैं कि उसे कोई बीमारी है।
साथ बैठने से नहीं होता एचआईवी
सीएमओ डा. एसपी चौधरी ने बताया कि एचआईवी पीड़ित के साथ बैठने से संक्रमण नहीं फैलता है॥ खांसने, छींकने से भी यह नहीं फैलता है। संक्रमित व्यक्ति को किस करने, हाथ मिलाने, उसके कपड़े पहनने, गले मिलने, साथ में खाना खाने से भी एचआईवी नहीं फैलता है। ऐसे में बच्चों को इससे डरना नहीं चाहिए। सभी को एचआईवी पीड़ितों के साथ सहानुभूति दिखानी चाहिए।
कैसे फैलता है एचआईवी
- एचआईवी पीड़ित के साथ संबंध बनाने।
- एचआईवी पीड़ित को लगाई गई सिरिंज से दूसरे को इंजेक्शन लगाने।
- संक्रमित व्यक्ति का रक्त दूसरे को चढ़ाने।
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कैसे बचे लोग
- इंजेक्शन लगवाते समय हमेशा नई सिरिंज का प्रयोग करें।
-खुद और हमसफर के प्रति हमेशा वफादार रहें।
- दाढ़ी बनाने के लिे दुकान वालों को नया ब्लेड इस्तेमाल करने को कहें।
पैसों की कमी इलाज में बाधा
चकमीरापुर, किरमिदियापुर के एचआईवी पीड़ितों के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। एचआईवी की चपेट में आई 60 वर्षीय महिला ने बताया कि उसके पास कानपुर तक जाने के पैसे नहीं है। डाक्टर ने दवा के साथ पौष्टिक चीजें खाने की सलाह दी है। महिला ने बताया कि दो वक्त की रोटी मुश्किल से नसीब होती है, ऐसे में इलाज मुश्किल हो रहा है।
दवा खाने में न बरतें लापरवाही
आईसीटी (एकीकृत परामर्श केंद्र ) हसनगंज के काउंसलर अल्ताफ ने बताया कि एचआईवी की पुष्टि के बाद मरीज को कानपुर एआरटी सेंटर भेज दिया जाता है। एआरटी सेंटर से मरीज को सबसे पहले 15 दिन की दवा दी जाती है। दवाएं टीबी रोग की तरह हार्ड होती हैं। ऐसे में दवाएं खाने से उलझन, पसीना आने व खाना अच्छा न लगने की समस्या आती है। यह शिकायतें एक सप्ताह से दस दिन तक होती हैं। ऐसे में मरीज को दवाएं खाना बंद नहीं करना चाहिए। दवाओं के साथ पौष्टिक आहार भी लिया जाए। मरीज बाहर की चीजों का सेवन न करें। उबला पानी पिएं।
इनसेट
एचआईवी के मरीजों को मिलेंगे सौ रुपये
एचआईवी के नोडल अधिकारी डा. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मरीज को एआरटी सेंटर कानपुर तक आने जाने के लिए शासन प्रत्येक माह सौ रुपये देगा। उन्होंने बताया कि यह आर्थिक मदद यात्रा भत्ते के रूप में दी जाएगी। मरीज के खाते में रुपये भेजे जाते हैं।