सौर ऊर्जा लालटेन दिखाती प्रीती व गांव की अन्य महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
सौर उर्जा ने प्रीती की जिंदगी में उजाला ला दिया है। सोलर चार्जर सिस्टम लगवाने के बाद वह प्रतिदिन करीब दो सौ रुपया कमा रही है और इससे पूरे परिवार का खर्चा चल जाता है। अब वह खुद की तरह दूसरी महिलाओं की जिंदगी में भी सौर लालटेन का प्रकाश पहुंचाना चाहती है।
बांगरमऊ तहसील के मुस्तफाबाद निवासी प्रीती कुशवाहा के पति कृष्ण कुमार खेती करते हैं। खेती से खुद के साथ दो बच्चों का पालन पोषणा करना मुश्किल भरा था। एक दिन अचानक प्रीती की मुलाकात क्षेत्र में सामाजिक कार्य कर रही संस्था पीपल टू पीपल इंडिया की वालंटियर आकांक्षा यादव से हुई।
आकांक्षा ने प्रीती के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखकर उसे दिल्ली बुलाया। यहां पर उसने प्रीती को टैरी सोलर ऊर्जा कार्यक्रम से सौर ऊर्जा प्रशिक्षण दिलवाया। प्रीती ने कुछ ही समय में इस हुनर को सीख लिया। इसके बाद प्रीती ने संस्था की मदद से अपने घर में सोलर चार्जिंग सिस्टम लगा लिया।
उसने 200 एलईडी लालटेन की व्यवस्था की। अब तक गांव के 100 लोग उसके ग्राहक बन चुके हैं। वह 100 लालटेन चार्ज कर गांव वालों को देतीं हैं। बाकी बची 100 को चार्जिंग में लगा देती है। अगले दिन वह लोग लालटेन बदल कर ले जाते हैं। इस तरह प्रति लालटेन वह दो रुपये जमा करती है।
सौ लालटेन पर उसे रोज दो सौ रुपये की आमदनी हो जाती है। प्रीती अपनी मेहनत और लगन से आसपास के अन्य गांवों का अंधेरा दूर करने की मुहिम में जुट गई है। प्रीती ने बताया कि सोलर लालटेन से गांव के लोगों की जिंदगी आसान हुई है और उसे भी कमाई का एक जरिया मिल गया है।
संस्था की वालंटियर आकांक्षा यादव ने बताया कि यह प्रीती की लगन और मेहनत का ही नतीजा है कि वह आज घर बैठे प्रतिदिन 200 रुपये कमा रही है। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि वह आने वाले समय में लोगों के लिए नजीर बनेगी।