चकलवंशी। लोको पायलट का शव गांव के बाहर बने दूसरे घर में फंदे से लटका मिला। परिजनों ने हत्या कर शव लटकाने का आरोप लगाया। जेब से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें जमीन के विवाद में पड़ोसी गांव के लोगों पर परेशान करने का आरोप लगाया है।
माखी थानाक्षेत्र के भदियार निवासी प्रशांत लोधी (30) पुत्र श्रीश्याम रेलवे विभाग में लोको पायलट थे। गुरुवार रात पुराने घर से एक किलोमीटर जंगेनगर स्थित नए मकान में सोने गए थे। शुक्रवार भोर पहर जब वह घर नहीं आए तो पिता ने फोन मिलाया। नंबर बंद जाने पर छोटे बेटे आशीष को बुलाने के लिए भेजा। दरवाजा अंदर से बंद था। भाई पड़ोसी की छत से अपनी छत पर गया। वहां आंगन के पास बने कमरे में फंदे से शव लटका देखा। घटना की जानकारी पर परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
सीओ माया राय व एसओ फोरेंसिक टीम के साथ पहुंचे और जांच की। पिता ने पड़ोसी गांव के युवक पर हत्या कर शव लटकाने का आरोप लगाया है। प्रशांत चार भाई-बहनों में गुलशन, आशीष और पूजा से बड़ा था। अभी उसकी शादी नहीं हुई थी। बेटे की मौत से मां मुन्नी देवी और अन्य परिजन बेहाल हैं। एसओ संदीप मिश्रा ने बताया कि पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
यह है मामला
फोरेंसिक टीम की ओर से जांच के लिए भेजे गए सुसाइड नोट में युवक ने पड़ोसी गांव गिरवरखेड़ा निवासी कन्हई के बेटे छब्बा, इंद्रपाल, प्रकाश, गोकुल पर मकान खाली करने का दबाव बनाने की बात लिखी है। यह भी लिखा है कि मकान खाली न करने पर छेड़छाड़, एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की यह लोग बार-बार धमकी दे रहे थे। इससे वह परेशान था। मृतक प्रशांत के छोटे भाई आशीष ने बताया कि गिरवरखेड़ा के कन्हई से 30 साल पहले गांव में बिना पक्की लिखा-पढ़ी के जमीन खरीदी थी। पिता ने उस जमीन पर घर बनवा दिया था। कन्हई के मरने के बाद उनके बेटे ने जमीन देने से मना कर दिया। तब से मामला दीवानी कोर्ट में चल रहा है।
मृतक की बहन ने उठाए सवाल
मृतक प्रशांत की छोटी बहन पूजा ने पूरे मामले में सवाल उठाए हैं। कहा है कि भाई प्रशांत अपने साथ बैग रखता था। उसमें सभी कागज रखे हुए था। घटना के बाद भाई के बैग में कोई कागज नहीं मिला है। न ही मोबाइल का सिम मिला है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह सब कौन लेकर चला गया।
दो साल पहले मिली थी नौकरी, घर में थीं खुशियां
छोटे भाई आशीष ने बताया कि पिता ने खेती कर परिवार चलाया और सभी को पढ़ाया भी। बड़े भाई प्रशांत ने साल 2019 में रेलवे की परीक्षा दी थी। चार साल बाद 2022 में रिजल्ट आने के बाद उन्हें लोको पायलट के पद पर तैनाती मिली। सरकारी नौकरी आने से घर में खुशियां थीं। परिवार की स्थिति में सुधार हुआ था। भाई की शादी के लिए भी लोग आ रहे थे। एक घटना ने परिवार की खुशियां छीन लीं।