विज्ञान किट खरीद में ‘खेल’ की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद अफसरों ने इस ओर ध्यान दिया। वहीं ब्लाक स्तरीय अफसर विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए तानाबाना बुनने लगे हैं। बीएसए इस मामले में फिलहाल कुछ भी जवान देने से बचते रहे। मंगलवार शाम एडी बेसिक लखनऊ मंडल ने मामले को संज्ञान में लिया। बीएसए से विज्ञान किट खरीदारी के बारे में जानकारी कर मामले को गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश दिए।
जूनियर स्कूलों में विज्ञान किट खरीदारी के लिए शासन से 67.12 लाख का बजट जारी किया था। इसमें प्रत्येक विद्यालय के लिए आठ हजार रुपये का बजट निर्धारित था। बजट में खेल करने के लिए ब्लाक स्तरीय अफसरों ने किट खरीदारी की जिम्मेदारी खुद संभाली और शिक्षकों से ब्लैंक चेकें जमा कराई। इसके बाद एक ही फर्म से कमीशन फिक्स कर किटें स्कूलों को भिजवा दी। अफसरों का खेल अब सामने आने लगा है। शिक्षक नेताओं के साथ ही शिक्षक विधायक ने भी घालमेल का अंदेशा जता डीएम से शिकायत कर मामले की जांच की मांग की है।
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मंगलवार विज्ञान किट खरीद में ‘खेल’ की खबर ‘अमर उजाला’ ने प्रकाशित किया। इसके बाद ब्लाक स्तरीय अधिकारी खरीद संबंधी पेपर दुरुस्त करने में जुट गए। मंगलवार शाम ज्वाइंट रिव्यू टीम के निरीक्षण के कारण तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा लखनऊ मंडल महेंद्र सिंह राणा ने ‘अमर उजाला’ की खबर का संज्ञान लिया। बीएसए दीवान सिंह यादव व कार्यालय में मौजूद बीईओ से मामले में पूछताछ की। मातहतों से बातचीत के बाद एडी बेसिक ने बीएसए को जांच के निर्देश दिए। एक पखवाड़ा के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है।
एक एनपीआरसी के कंधे पर थी जिम्मेदारी
सिकंदरपुर कर्ण ब्लाक में भी विज्ञान किट खरीदारी में कमीशन का खेल जमकर खेला गया है। ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने एक एनपीआरसी को शिक्षकों से ब्लैंक चेक इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी थी। एनपीआरसी ने अधिकारी के निर्देश पर शिक्षकों को विभागीय कार्रवाई का हौव्वा दिखाकर ब्लैंक चेक एकत्र कर अधिकारी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। अधिकारी के नजदीकियों में शुमार एनपीआरसी पर एक मामले में विभागीय जांच भी चल रही है।