मामला- दो
असोहा के ही एक दूसरे गांव निवासी 12 वर्षीय शिवेंद्र (बदला नाम) के माता-पिता प्राइवेट फैक्टरी में काम करते थे। अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में पहले पिता को बुखार आया। कुछ दिन इलाज कराया। आराम न मिलने पर कानपुर के एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया। वहां ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। कुछ समय बाद तबियत ज्यादा खराब हुई और आक्सीजन की जरूरत पड़ी। किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। 21 अप्रैल को पिता ने दम तोड़ दिया। इसी बीच मां को भी सांस लेने में तकलीफ हुई। इलाज मिलने से पहले ही वह भी दुनिया छोड़ गईं। शिवेंद्र की परवरिश अभी उनके दादी-बाबा कर रहे हैं।
दो बच्चों के माता और पिता दोनों की कोरोना से मौत हो चुकी है। 28 बच्चों में किसी ने मां को खोया तो किसी ने पिता को। इनके परिवारीजनों से संपर्क किया गया तो सभी ने खुद ही परवरिश करने की बात कही है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर विभाग की ओर से सहायता की जाएगी। - रेनू यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी
इस तरह मिलेगा लाभ
पिता के निधन पर
मां को निराश्रित पेंशन, पारिवारिक लाभ, समूह से जोड़कर जीविकापार्जन की व्यवस्था।
मां के निधन पर
ग्रामीण क्षेत्र का होने पर मनरेगा जॉब कार्ड, शहर में श्रमायुक्त कार्यालय से रजिस्टर्ड कराना।
विभाग की ओर से अन्य योजनाओं का लाभ
मां-पिता दोनों के निधन पर
- परिवार के किसी सदस्य को निराश्रित बच्चों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
- जिम्मेदारी न लेने की स्थिति में चाइल्ड लाइन में रखकर भरण-पोषण और शिक्षण की व्यवस्था।