उन्नाव। जिला कारागार के पीछे हरदोई बाईपास मार्ग पर नगर पालिका द्वारा डंप किया जा रहा शहर का कचरा जेल बंदियों के साथ ही जेल कर्मियों व उनके परिवार के लिए भी मुसीबत बना है। बमुश्किल पच्चीस मीटर दूर पर डंप कचरा, मृत मवेशियों की सड़ांध व जलाए गए कूड़े के धुआं से सांस लेना दुश्वार रहता है। जेल कर्मियों के परिवार संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। कर्मियों ने बताया कि दिन-रात अगरबत्ती जलाकर दुर्गंध से बचाव करते हैं। वहीं, ठंड में धूप सेंकने छत पर नहीं जाते। गर्मियों में कूलर भी नहीं चलाते।
शहर में रोज करीब 50 टन कूड़ा निकलता है। डंपिंग ग्राउंड न होने से नगर पालिका कई साल से कूड़े को उन्नाव-हरदोई बाइपास मार्ग पर जिला जेल के पीछे चांदमारी मैदान में डंप करा रही है। नगर पालिका के इस अवैध कूड़ा डंपिंग स्थल से करीब 25 मीटर की दूरी पर जेल कर्मियों की नई आवासीय कॉलोनी अधिकारियों व कर्मियों के 16 परिवार और पुरानी कॉलोनी में 60 परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले ब्रजभान, गौतम सिंह, जसवंत सिंह, अशोक, प्रमोद, भगवानदास, दामोदर दत्त आदि ने बताया कि कॉलोनी के पास ही डंप कूड़े की दुर्गंध से परेशान हैं। बचने के लिए दिनरात खिड़की दरवाजे बंद रखते हैं और घर में दिन-रात अगरबत्ती जलाकर दुर्गंध से बचने को कोशिश करते हैं। कर्मचारियों के परिवार की महिलाओं में मीन, रोली, शैल, सुमित्रा, देवकी, शालिनी ने बताया कि आए दिन परिवार के लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आते हैं। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की है। वह न तो खुले में जा पाते हैं न खेलने। जेल कर्मियों के घरवालों का कहना है कि नगर पालिका को कई बार शिकायती पत्र लिखे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. शोभित अग्निहोत्री ने बताया कि कूड़ा कचरे में पॉलिथीन और प्लास्टिक में रंजक (रंग देने वाला) होता है। इसमें कैडमियम होता है जो धुआं के जरिए सांसों से होते हुए रक्त में मिल जाता है। इसका हृदय पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह दिल के आकार को बढ़ा सकता है। साथ ही मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। धुएं में सल्फर, कार्बन, कार्बन मोनोआक्साइड, बेंजीन, क्लोराइड, विनायल, इथनॉल ऑक्साइड होता है। इनके लगातार असर से व्यक्ति को लीवर, किडनी, त्वचा कैंसर होने की आशंका रहती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि बस्तियों से निकलने वाले कूड़े-कचरे में फलों, अन्न व मांस के अवशेष के अलावा पॉलिथीन व ठोस अपशिष्ट भी होता है। कूड़ा सड़ने पर मीथेन व कार्बन डाई ऑक्साइड सहित कई हानिकारक गैसें निकलती हैं। जो फेफड़ों सहित शरीर के अन्य अंगों को नुकसानदेय हो सकता है। उन्होंने बताया कि कूड़े को खुले में जलाने पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) ने पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है।
जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि जेल के पास कूड़ा डंप किए जाने से जेल बंदियों के साथ ही जेल कर्मियों के परिवार भी परेशान हैं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका को कई बार पत्र भेजा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्रशासन के माध्यम से नगर पालिका को फिर लिखा जाएगा।
नगर पालिका ईओ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि कूड़ा डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था की जा रही है। जल्द से जल्द समस्या को हल करने का प्रयास किया जा रहा है।