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जांच टीम ने देखा व्यय व स्टाक रजिस्टर, प्रचार सामग्री का लिया नमूना

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उन्नाव। सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान में प्रचार सामग्री खरीद मामले में शुक्रवार को भी अधिकारी जांच के लिए कार्यालय पहुंचे। व्यय व स्टाक रजिस्टर देखने के साथ ने प्रचार सामग्री का नमूना लिया। प्रारंभिक जांच में प्रचार सामग्री व खर्च का ब्योरा दुरुस्त मिला है।
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जिले में 10 अक्तूबर से शुरू हुए सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान का प्रचार कराने के लिए शासन ने दो लाख का बजट दिया था। इसमें प्रचार प्रसार सामग्री की खरीद होनी थी। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामग्री की खरीद का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि डीएम स्तर से खरीद की अनुमति नहीं मिल पाई थी।
इस बीच अभियान की शुरुआत का समय नजदीक आने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रचार प्रसार सामग्री पर 1.15 लाख खर्च कर दिए। इसकी शिकायत डीएम व सीडीओ से की गई थी। शिकायत पर गुरुवार को जांच टीम ने तहकीकात शुरू करते हुए व्यय रजिस्टर मांगा था। हालांकि सामग्री वितरित होने की वजह से क्षय रोग विभाग के कर्मी जानकारी नहीं दे सके थे। शुक्रवार को परियोजना निदेशक डीआरडीए जनार्दन सिंह ने क्षय रोग विभाग कार्यालय पहुंच जांच की। उन्होंने व्यय, स्टाक वितरण रजिस्टर देखा। साथ ही प्रचार सामग्री में पर्चे व होर्डिंग बैनर का नमूना लिया। उधर अपना पक्ष रखने के लिए देर शाम जिला क्षय रोग विभाग के अधिकारी व कर्मी डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय के पास पहुंचे। उन्होंने खरीद का ब्योरा डीएम को उपलब्ध कराया है। जिला क्षय रोग अधिकारी ज्ञान प्रकाश के अनुसार खरीद में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं बरती गई है।
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1.55 लाख के सापेक्ष खर्च किए 1.15 लाख
सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान की प्रचार सामग्री का ई टेंडर कराया गया था। 10 अक्तूबर से अभियान शुरू होने के चलते प्रचार सामग्री खरीद के लिए डीएम से अनुमोदन नहीं लिया जा सका था। क्षय रोग विभाग ने 1.55 लाख के टेंडर के बदले 1.15 लाख रुपये खर्च कर 6 हजार पर्चे, तीन होर्डिंग बैनर व अन्य प्रचार सामग्री छपवाई है।
सीडीओ के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
शुक्रवार शाम सीडीओ प्रेमरंजन सिंह ने प्रचार सामग्री खरीद मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। इसमें परियोजना निदेशक डीआरडीए, वरिष्ठ कोषाधिकारी व जिला कृषि अधिकारी शामिल हैं। टीम से एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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