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जेल में इंटरकॉम का पहरा, बंदियों पर नजर

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जेल में इंटरकॉम सिस्टम के जरिए बंदियों के बारे में जानकारी लेते जेल अधीक्षक एके सिंह । - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। जेल में बंदियों की हर गतिविधि पर अभी सीसीटीवी से नजर रखी जा रही थी। अब सीसीटीवी के साथ इंटरकाम का पहरा भी बैठाया गया है। हर बैरक के अलावा, अस्पताल, व अधिकारियों के केबिन में इंटरकॉम की सुविधा दी गई है। कोई भी छोटी से छोटी या बड़ी समस्या होने पर इंटरकाम की मदद से किसी भी अधिकारी को तत्काल सूचना देकर हालत पर काबू पाया जा सकेगा। जेल में 33 इंटरकॉम सिस्टम लगाए गए हैं। जिनका कोड भी निर्धारित कर दिया गया है।
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उन्नाव जिला कारागार में जैमर की व्यवस्था न होने से अक्सर जेल में बंदियों द्वारा मोबाइल का प्रयोग होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिससे जेल प्रशासन को किरकिरी का भी सामना करना पड़ा। जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि जेल में मोबाइल के प्रयोग पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। मोबाइल लेकर किसी भी कर्मी को जेल में प्रवेश की अनुमति नहीं है। जेल की संचार व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए 33 इंटरकाम सिस्टम लगाए गए हैं। बताया कि इंटरकॉम सिस्टम वॉयस संचार प्रणाली है। यह सार्वजनिक टेलीफोन नेटवर्क से स्वतंत्र रूप से काम करता है। इंटरकॉम सिस्टम से 24 घंटे जेलकर्मी एक-दूसरे से कनेक्ट रहेंगे। बताया कि जेल में कोई भी समस्या होने या बंदी की संदिग्ध गतिविधि पर जेलकर्मी तत्काल जिस अधिकारी को चाहेगा, तुरंत इसकी जानकारी दे सकेगा। सभी टेलीकॉम सिस्टम का कोड भी जारी किया गया है। जिनका नंबर 200 से 233 है।
जेल में बैरक नंबर 2, 3, 4, 6 ए, 6 एच, 7, 8, 9, 10, 11, हाईसिक्योरिटी बैरक, बैरक नंबर 17, पाकशाला, अस्पताल, सिलाई कारखाना, गल्ला गोदाम कार्यालय, सिद्धदोष कार्यालय, एकाउंट कार्यालय, जेलर व जेल अधीक्षक कार्यालय व आवास के साथ फार्मासिस्ट आवास पर भी टेलीकॉम सिस्टम लगाए गए हैं।
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जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों के साथ जेल में इंटरकॉम सिस्टम होने से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है। इसके अलावा 14 वॉकी-टॉकी भी जेल में हैं। जिससे कहीं भी कोई समस्या होने पर तत्काल सुलझा लिया जाता है।
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