मृत बच्चे अनुग्रह की मौत के बाद बिछिया सीएचसी के गेट पर बैठे परिजन।
- फोटो : UNNAO
बिछिया(उन्नाव)। बुखार से पीड़ित बच्चे की स्वास्थ्य केंद्र में मौत हो गई। आक्रोशित परिजनों ने शव को अस्पताल गेट पर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप था कि कोई डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं आया। जिससे उसने दम तोड़ दिया। हंगामे की सूचना पर प्रभारी चिकित्साधिकारी व सदर विधायक मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाबुझाकर मामला शांत कराया। इस दौरान करीब आधे घंटे तक ओपीडी बाधित रही।
पुरवा कोतवाली के घूरखेत गांव निवासी चंद्रशेखर का एक वर्षीय पुत्र अनुग्रह को छह दिन पहले बुखार आया था। परिजन उसे सीएचसी लेकर आए थे। यहां डब्ल्यूएचओ टीम के प्रभारी शुभांकर ने उसका इलाज किया था और स्टूल सैंपल जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा था। शनिवार सुबह बच्चे की हालत फिर बिगड़ गई। परिजन पहले बच्चे को गांव के ही एक डॉक्टर के पास ले गए। वहां इंजेक्शन लगवाने के बाद सीएचसी लाए तब तक उसकी हालत और बिगड़ चुकी थी। परिजनों का आरोप था कि सुबह 7.30 बजे अस्पताल में सिर्फ फार्मासिस्ट पंकज यादव उपस्थित थे। बच्चे की हालत बिगड़ती देख वह सीएचसी प्रभारी आरपी सचान को आवास से बुलाकर लाए। जब तक वह आते बच्चे ने दम तोड़ दिया था। बच्चे की मौत की खबर सुन परिजन हंगामा करने लगे। किसान यूनियन भानू गुट के ब्लाक अध्यक्ष श्रवण कुमार व ग्राम प्रधान घूरखेत के बेटे राहुल भी मौके पर पहुंचे। हंगामे की सूचना पर सदर विधायक पंकज गुप्ता भी पहुंच गए। सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष से फोन पर वार्ता की और हंगामा कर रहे परिजनों को समझाकर घर भेज दिया।
सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि बच्चे को परिजनों ने पहले कहीं और इंजेक्शन लगवाया था। उसके बाद सीएचसी लाए थे। हमारा स्टाफ मौजूद था। रही स्टूल रिपोर्ट की बात तो वह दो सप्ताह में आती है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी सचान ने बताया कि परिजन जब बच्चे को लेकर आए थे तभी उसकी श्वासनली बंद हो गई थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी।