उन्नाव। लाख प्रयासों के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा है। अव्यवस्थाओं के चलते यहां इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों को चादर तक नसीब नहीं हो रही है। हालात यह हैं कि भर्ती हुए मरीज या तो गंदी चादर ही इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर बिना चादर के ही बेड पर लेटे हैं। ओढ़ने और बिछाने के लिए अपने घर से चादर लाना मरीजों के तीमारदारों की मजबूरी बन गई है। यह स्थिति तब जब जिला पुरुष अस्पताल हर माह चादरों की धुलाई में 65 से 70 हजार रुपये खर्च करता है। अधिकारियों का कहना है कि चादर धुलाई का ठेका न होने से समस्या हो रही है।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों का बुरा हाल है। इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड तक में बेड से चादरें गायब हैं। नियम यह है कि नियमित रूप से रोज सुबह चादर बदली जाए। अगर चादर गंदी हो जाती है तो उसे दिन में एक से अधिक बार भी बदलना है। नया मरीज भर्ती होने पर चादर गंदी हो या ना हो बेड पर धुली चादर बिछाने का भी नियम है, लेकिन करीब 15 दिन से जिला अस्पताल में यह सारे नियम दरकिनार हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को ओढ़ने, बिछाने के लिए चादरें नहीं मिल पा रही हैं। ओढ़ने के लिए तो दूर, बेड पर बिछाने के लिए भी चादर नहीं मिल रही। कोई मरीज बिना चादर के बेड पर लेटा है तो कोई बिछाने वाली चादर को ओढ़ने में प्रयोग कर रहा है।
क्या कहते हैं मरीज
बीघापुर के नीरज ने बताया कि वह तीन दिन से भर्ती हैं। पहले दिन एक चादर मिली थी, उसी से काम चला रहे हैं। कई बार मांगने पर गंदी चादर दी गई। उन्होंने वह नहीं ली अब घर से चादर मंगवाकर ओढ़ रहे हैं।
-सरोसी की मीरा ने बताया कि वह अपने घायल भाई का इलाज करा रही हैं। बेड की चादर बदलना तो दूर दो दिन से बिछाने के लिए ही नहीं मिली। बिना चादर के ही काम चला रहे हैं।
शहर के शिवनगर निवासी देवा ने बताया कि दो दिन से चादर के लिए बार-बार कह रहे हैं। वार्डबॉय बार-बार टालता रहा। कई बार कहने पर बताया कि धुली चादर उपलब्ध नहीं हैं।
रामसिंघ खेड़ा के दिवाकर ने बताया कि जिला पुरुष अस्पताल में चादर की समस्या है। मरीजों को फॉम के गद्दों पर लिटाया जा रहा है। चादर न होने से रेक्सीन की वजह से पसीना-पसीना हो जाते हैं।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला पुरुष अस्पताल में अब बेड की चादरों की कोई समस्या नहीं है। बकाया भुगतान न होने पर पिछले दिनों ठेकेदार ने धुलाई बंद कर दी थी। उसे समझाया गया है कि भुगतान में देर भले ही हो, लेकिन एक-एक रुपये का भुगतान होगा। वह मान गया है और चादरों की धुलाई शुरू कर दी है। सभी मरीजों के बेड पर चादर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डॉ. राजीव गुप्ता, सीएमएस जिला पुरुष अस्पताल