अजगैन थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव पिपरोसा निवासी फिरोज अली पुत्र चिराग अली की शादी तौशीफ की बहन नाजिया से हुई थी। उसके दो साल का बेटा था और वह गर्भवती थी। 8 मई सन 2012 को अजगैन थाने में तौशीफ ने तहरीर देकर बताया कि उसने अपनी बहन की शादी चार साल पहले फिरोज अली निवासी पिपरोसा से की थी। बताया कि सुबह उसे फोन आया कि उसकी बहन नाजिया की मौत हो गई है। यह सुन वह आनन-फानन में बहन के घर पहुंचा। वहां देखा कि बहन का शव घर के बाहर रखा हुआ था और ससुरालीजनों ने बहन के फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की जानकारी दी। बताया कि बहन के ससुरालीजन शुरू से ही फ्रिज और 50 हजार की मांग करते थे और उसके साथ मारपीट करते थे। आरोप लगाया कि इसी कारण से उसकी बहन को जान से मार दिया गया। भाई ने थाने में तहरीर देकर मृतका के पति फिरोज अली, सास मोमिना, ननद जमीला व ससुर चिराग अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया था। तभी से मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही थी। बुधवार को कोर्ट में अंतिम सुनवाई हुई। जिसमें सहायक शासकीय अधिवक्ता योगेश कुमार सिंह ने अपनी दलील में कहा कि आरोपियों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर गर्भवती महिला की हत्या की थी। यह कृत्य क्षम्य नहीं है। शासकीय अधिवक्ता की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश डा. जया पाठक ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने अभियुक्तों को सजा के अलावा 30-30 हजार का जुर्माना भी लगाया। कहा कि जुर्माना अदा न करने पर सभी को डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।