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कैसे न जहरीला हो लोनी ड्रेन का पानी

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दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोनी ड्रेन में बनाए गए बांध को कटने से बचाने के लिए लगाए गए ड्रेन ? - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। भूगर्भ में जहर घोल रहे लोन नदी के पानी में प्रदूषण की मुख्य वजह टेनरियों, स्लॉटर हाउसों और औद्योगिक क्षेत्र का गैर शुद्धीकृत पानी है। इसी का नतीजा है कि कभी नदी रही लोन अब गंदे नाले के रूप में है। प्रदूषित उत्प्रवाह वाली 28 में से सिर्फ 14 इकाइयां ही सीईटीपी (कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से जुड़ी हैं। दूषित पानी से लोन नदी अब गंदा नाला बन चुकी है। शहर से लेकर रायबरेली जिले की सीमा में डलमऊ के पास गंगा में मिलने वाली लोन नदी का पानी गंगा जल को भी प्रदूषित कर रहा है।
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शहर के पास दहीचौकी औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 28 ऐसी फैक्टरियां हैं जिनमें टेनरी, स्लॉटर हाउस, केमिकल, पशु आहार, खाद आदि बनाने का काम होता है। इन इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी को साफ करने के लिए लोनी ड्रेन के पास स्थित सीईटीपी लगा है। लेकिन सिर्फ 14 इकाइयां ही इससे जुड़ी हैं। सीईटीपी से 13 टेनरी और एक डॉगच्यू बनाने वाली एक फैक्टरी शामिल हैं। अन्य फैक्टरियों व स्लॉटर हाउसों का पानी नालों के जरिए सीधे लोनी ड्रेन में बहाया जाता है। यही वजह है कि लोन नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है और भूगर्भ के पानी में जहर घोल रही है।
प्रयागराज में चल रहे माघ मेला को देखते हुए दूषित उत्प्रवाह को गंगा नदी में छोड़ने पर पाबंदी है। इससे सीईटीपी से जुड़ी इकाइयों का भी उत्प्रवाह बंद है। लेकिन इसके बाद भी लोनी ड्रेन लबालब है। हालत यह है कि स्लॉटर हाउस और टेनरी संचालक लोनी ड्रेन में जगह-जगह मिट्टी के बांध बनाकर पानी के बहाव को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। रविवार को बिछिया ब्लॉक के नंदौली गांव के पास दो स्थानों पर मिट्टी के बांध बनाकर पानी को रोका गया।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि प्रदूषित पानी लोन नदी या गंगा नदी में न जाए इसपर नजर रखी जा रही है। साथ ही अलग-अलग टीमें निगरानी कर रही हैं। गड़बड़ी होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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