जिला अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
- फोटो : UNNAO
उनाव। कोरोना के नये वायरस ओमिक्रॉन के रूप में कोरोना की तीसरी लहर का फरवरी में खतरे का अंदेशा जताया जा रहा है। फिर भी जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी तक डॉक्टरों का टोटा है। सांसों के लिए जिला अस्पताल सहित चार स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्लांट तो तैयार कर दिए गए हैं, लेकिन आरटीपीसीआर जांच अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जांच के लिए सैंपल लखनऊ भेजने की मजबूरी है। मौजूदा समय में 1822 सैंपल की रिपोर्ट लंबित है।
ओमिक्रॉन के संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी हैं। नवाबगंज के सरस्वती मेडिकल कॉलेज, बिछिया, मौरावां, औरास व बांगरमऊ में पीकू वार्ड बनाए गए हैं। करोड़ों रुपये कीमत की मशीनें लगवाई गई हैं। जिला अस्पताल सहित पीकू वार्ड बने स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्लांट भी लगा दिए गए हैं। कोविड जांच के लिए सबसे अहम कड़ी मानी जाने वाली आरटीपीसीआर मशीन का संचालन आज तक नहीं हो पाया है। शुक्लागंज की ठाकुरखेड़ा सीएचसी में कोरोना सैंपलों की जांच के 35 लाख रुपये की लागत से बनी बीएसएल लैब-टू का 15 दिन पहले मुख्यमंत्री ऑनलाइन शुभारंभ कर चुके हैं। इसके संचालन में बड़ी समस्या बनी सैंपल लगाने वाली डीपवेल प्लेट व 45 केवीए के ट्रांसफार्मर की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि मिले संसाधनों में ही बेहतर करने का प्रयास जारी है। आरटीपीसीआर मशीन संचालन के लिए बिजली विभाग के साथ स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा है। जल्द ही इसका संचालन होगा।
जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक डॉक्टरों का टोटा है। जिले के 31 लाख लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 150 डॉक्टरों की तैनाती है। पांच हजार पर एक डॉक्टर का मानक है। यही हाल बाल रोग विशेषज्ञों का है। पांच साल तक के छह लाख बच्चों के इलाज के लिए सिर्फ 12 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। 17 सीएचसी में 13 स्वास्थ्य केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। इससे 50 किलोमीटर सफर कर बच्चे को दिखाने जिला अस्पताल लाना परिजनों की मजबूरी हैं। ऐसे में ओमिक्रॉन से निपट पाना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी मजबूरी है।