नवाबगंज। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण कराने के बाद ग्रामीणों में बुखार आने का डर बना हुआ है। टीकाकरण कराने पहुंचने वाले लोगों को दस लोगों के आने पर ही वॉयल खोलने की बात कहते हुए इंतजार कराया जाता है। दस की संख्या पूरी न होने पर इंतजार करने वाले ग्रामीणों को वापस कर दिया जाता है। वह दोबारा टीका लगवाने ही नहीं पहुंच रहे हैं। शनिवार को एतबारपुर के मजरा रवनहार में 10 ग्रामीण भी टीका लगवाने नहीं पहुंचे।
एतबारपुर के मजरा रवनहार की आबादी 1171 है। टीकाकरण के लिए गांव में दो बार कैंप लग चुका है। पहले कैंप में 60 ग्रामीणों ने व दूसरे कैंप में 14 ग्रामीणों ने कोविड का टीका लगाया था। टीका लगवाने वालों की उम्र 45 साल से अधिक थी। शनिवार को तीसरा कैंप प्राइमरी स्कूल में लगा था। इसमें एएनएम सीमादेवी, आशा कार्यकर्ता कमलेश कुमारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता सिंह की ड्यूटी थी। दस लोग भी टीका लगवाने नहीं पहुंचे। ग्रामीणों का कहना था कि टीका लगवाने के बाद तेज बुखार का डर रहता है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वह प्राइमरी स्कूल में लगे कैंप में टीका लगवाने पहुंचे। स्वास्थ्य टीम ने यह कहकर लौटा दिया कि जब तक 10 लोग नहीं हो जाते वैक्सीन की वॉयल नहीं खोली जाएगी।
कम्यूनिटी हेल्थ अफसर अभिनव मिश्रा ने बताया कि निगरानी समिति में शामिल ग्राम प्रधान व कोटेदार जागरूकता के लिए सहयोग नहीं कर रहे हैं।
सहबसी गांव में पूरे दिन स्वास्थ्य टीम बूथ पर ग्रामीणों के आने का इंतजार करती रहीं। कोई भी टीका लगवाने नहीं पहुंचा।
सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि अलग-अलग गांव में कोविड टीकाकरण के लिए भेजी गई टीमों में सहबसी में संख्या शून्य रहीं। हिम्मतखेड़ा गांव में 22, गांधीनगर में 22 लोगों ने टीका लगवाया। वहीं सीएचसी में 99 लोगों ने टीकाकरण कराया।