दो साल पहले ओलावृष्टि में रबी सीजन की फसलें नष्ट होने से किसानों को तगड़ा नुकसान हुआ था। सरकार ने अन्नदाता के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए करोड़ों रुपये जारी किए लेकिन प्रशासनिक स्तर पर पूरा पैसा नहीं बंट पाया। हालांकि प्रशासन का दावा है कि सभी प्रभावित किसानों को मुआवजे की राशि से दी जा चुकी है, लेकिन असलियत में बड़ी संख्या में किसान लाभ से वंचित रह गए। अब प्रशासन मुआवजे की बची धनराशि सरेंडर करने की जानकारी होने पर शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।
2015 की जनवरी में तो ठीकठाक ठंड पड़ने और पाला गिरने से रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की अच्छी पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा था। उसी बीच फरवरी और मार्च में प्रकृति का कहर किसानों पर गिरा। तगड़ी ओलावृष्टि व बिन मौसम की बारिश से रबी सीजन की प्रमुख गेहूं समेत अन्य फसलों को तगड़ा नुकसान पहुंचा था। जिला प्रशासन की ओर से सर्वे कराकर करोड़ों के नुकसान का आंकलन करके रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी।
उस समय प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए 5.90 करोड़ रूपये में से 3.16 करोड़ रूपये का वितरण करा दिया गया। हालांकि उस समय किसानों का कहना था कि फसलों का जो आंकलन किया गया है वह काफी कम है। उस समय नुकसान के अनुसार जारी की गई धनराशि पीड़ित किसानों के लिए ऊंट के मुहं में जीरा साबित हुई। सूत्रों की मानें तो तहसीलस्तर पर राहतराशि बांटने में हीलाहवाली की गई। इसी कारण मुआवजे की मिली धनराशि का शत-प्रतिशत वितरण नहीं हो पाया।
प्रशासन के पास लगभग 2.74 करोड़ रूपये की धनराशि बच गई। इसके बाद अधिकारियों ने जब शासन से इस धनराशि को सरेंडर करने के लिए मार्गदर्शन मांगा तो हंगामा खड़ा हो गया। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने इस मामले में जिले के अधिकारियों को तलब किया है। जिससे हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए नए नियम/कायदे गढ़ने में जुटे हुए हैं।
सबसे ज्यादा सदर को दिया गया था पैसा
ओलावृष्टि राहत के मिली धनराशि में सबसे ज्यादा पैसा सदर को 1.50 करोड़ दिया गया था। बांगरमऊ को 1.20 करोड़, हसनगंज को 1.04 करोड़, सफीपुर को 80 लाख, बीघापुर को 52 लाख और पुरवा को 84 लाख रुपये आवंटित हुए थे। ओलावृष्टि से पुरवा तहसील क्षेत्र के 41 गांव नुकसान के दायरे में आए थे। शासन से पैसा भी जारी कर दिया गया था लेकिन सात गांव के किसानों को मुआवजे के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। सात गांवों में असोहा, चौपई, शाहाबाद ग्रंट, दरेहटा, अचली ओगरापुर, सरैंया, पाठकपुर के किसान आज भी मुआवजे की बांट जोह रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति हसनगंज, सफीपुर व बीघापुर तहसीलों की रही। यहां के किसान भी मुआवजे के लिए आंसू बहाते रहे लेकिन उन्हें पैसा के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला।