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ई-रिक्शा चालकों पर मेहरबान हुई सरकार

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ई-रिक्शा में सवारी भरकर ले जाता चालक (फाइल फोटो) । - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। लॉकडाउन के दौरान कोई भी बदहाली का शिकार न हो, इसके लिए प्रदेश सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। शासन की ओर से अब ई-रिक्शा चालकों को भी लाभ देने की कवायद शुरू की गई है। शासन ने एआरटीओ विभाग से पंजीकृत ई-रिक्शा का ब्योरा मांगा है। शर्त है कि उनका परमिट फरवरी माह तक वैध रहा हो। ऐसे ई-रिक्शा चालकों के नाम-पता का ब्योरा जुटाने के अलावा उनके बैंक अकाउंट व बैंक आईएफएससी कोड भी मांगा गया है। एआरटीओ ने बताया कि शासन से मांगा गया ब्योरा एकत्र किया जा रहा है।
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लॉकडाउन होने से वाहनों में सर्वाधिक नुकसान ई-रिक्शा चालकों का हुआ है। संचालन न होने से इन रिक्शा चालकों को रोजी-रोटी का संकट है। सुबह से शाम तक ई-रिक्शा चलाने के बाद ही यह परिवार का पेट भरते हैं। लॉकडाउन के दौरान बने हालातों के बीच शासन ने एआरटीओं में पंजीकृत इन ई-रिक्शा चालकों के दर्द पर मरहम लगाने की योजना बनाई है। एआरटीओ प्रशासन अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि उनके कार्यालय में 2800 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। पंजीयन के अलावा फरवरी माह तक वैध परमिट वाले ई-रिक्शा चालकों का ही ब्योरा मांगा गया है।
एआरटीओ प्रशासन अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ब्योरा देने के लिए कोई भी ई-रिक्शा चालक एआरटीओ कार्यालय न पहुंचे। सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए सभी का ब्योरा एआरटीओ कार्यालय की ई-मेल पर मंगाने का फैसला लिया गया है। बताया कि कार्यालय की ई-मेल आईडी artoun-up@nic.in पर सभी पंजीकृत ई-रिक्शा चालक अपनी डिटेल भेजें।
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