देश में बालिकाओं की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। बालिकाओं के साथ शिक्षा, पौष्टिक, आहार व स्वास्थ्य संबंधी जैसी मूलभूत जरूरतों के साथ भेदभाव तथा बालिकाओं को सामाजिक आर्थिक रूप से परिवार पर बोझ समझा जाता है।
इसके पीछे व्याप्त सामाजिक कुरीतियां प्रमुख कारण हैं। यह बातें सीएमओ डॉ. गीता यादव ने निराला प्रेक्षागृह में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत आयोजित जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला में कहीं।
सीएमओ ने कहा कि गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच करना कानूनी एवं सामाजिक अपराध है तथा अधिनियम का उल्लंघन करने पर जांच करने वाले चिकित्सक को 3 से 5 वर्ष की कैद तथा पचास हजार रुपये के जुर्माने के साथ उसका पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है।
नोडल अधिकारी डॉ. अर्जुन सिंह सारंग ने कहा कि गिरते शिशु लिंगानुपात को रोकने से जन सामान्य में जागरूकता लानी होगी। कार्यशाला में डॉ. आरके गौतम, डॉ. एके त्रिपाठी, नगर शिक्षाधिकारी सुरेशचंद्र वर्मा, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वीके वर्मा आदि मौजूद रहीं। संचालन डॉ. मीना चावला, डॉ. शैलेश बाजपेई, डॉ. प्रशांत उपाध्याय, डॉ. अतुल भारती, नीरज निगम आदि मौजूद रहे।