नोटबंदी के 41वें दिन की शाम सोशल मीडिया के जरिये पता चला कि अमान्य करेंसी बिना शर्त पांच हजार रुपये तय जमा करने और इससे अधिक पर बैंक में लिखित रूप से कारण स्पष्ट करने की बाध्यता है। इसके साथ ही हर कोई जानकारी जुटाने में लग गया।
मंगलवार सुबह इसकी पुष्टि हुई तो लोग सारे कामकाज छोड़ घर में रखे बचे हुए 1000 व 500 रुपये के नोट जमा करने बैंक पहुंच गए। पूरे दिन बैंकों में खासी भीड़ रही। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या कारण बताएं। जिससे आयकर विभाग की नजर में न आएं। बैंक मैनेजरों ने पांच हजार से अधिक की धनराशि जमा करने वालों से लिखित में पुराने नोट अब तक जमा न कराने का रिकार्ड सुरक्षित किया।
आठ नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने 500-1000 के नोट बंद करने की घोषणा की थी। पुराने नोट बदलने और उन्हें जमा कराने के लिए 30 दिसंबर का वक्त दिया था। सोमवार की देर शाम सोशल मीडिया, न्यूज पोर्टल पर वित्त मंत्री की ओर से अमान्य पुराने नोट जमा करने की सीमा एक ही बार पांच हजार रुपये तय होने की सूचना अपडेट हुई तो शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी जानकारी जुटाने में लग गए।
मंगलवार की सुबह बैंकों में नगदी जमा करने को उमड़ी भीड़ से अफरा तफरी का माहौल रहा। आरबीआई की गाइड लाइन के तहत शाखा प्रबंधकों ने पांच हजार से ज्यादा नोट जमा करने आए खाताधारकों से लिखित में लिया कि यह रकम कहां से आई है और जमा करने में इतनी देर क्यों हुई। बैंक सूत्रों के अनुसार मंगलवार को जिले में 8.5 करोड़ के बड़े नोट महज आठ घंटे में जमा हुए।
500 रुपये के नोट से 400 का सामान मिला
परियर। पुराने 500 रुपये के नोट पर 400 रुपये का सामान मिल रहा है। इससे मजदूर ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं। सफ ीपुर कोतवाली क्षेत्र के सदमपुर गांव के सुंदर पुत्र छोटा राजमिस्त्री अब्बासपुर में नानुबाबा दरगाह के पास स्कूल भवन बनाने का काम कर रहा था।
इस सप्ताह रविवार को मजदूरी का भुगतान हजार व पांच सौ के नोट में 3500 रुपये मिले तो वह चौक गया और लेने से मना किया। ठेकेदार ने चलन करेंसी न होने की बात कही। घर की जरूरतों को देखते हुए उसने रुपये ले लिया और काम छोड़ दिया। एक पांच सौ का नोट अब्बासपुर में हार्डवेयर की दुकान में चार सौ रुपये पर चल पाया। इससे परिवार के खाने के लिए उसने सामान खरीदा। बाकी रुपये परियर स्थित ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त में जमा कर दिया।