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जेल में मिला गांजा, चरस, सिम और चार्जर

Sun, 07 Jun 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। शासन के निर्देश पर रविवार को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने जेल का पांच घंटे तक चप्पा-चप्पा खंगाला। तलाशी के दौरान जेल में चल रहे ‘खेल’ का खुलासा हुआ। पुलिस ने एक बैरिक के बाहर मिट्टी में और एक शौचालय में छिपाकर रखा गया चरस, गांजा, हजारों की नगदी, मोबाइल चार्जर, सिम, और पेन ड्राइव बरामद की। छापामार टीमों ने सभी बैरिकों और बंदियों की तलाशी ली। महिला बैरिकों में भी सघन तलाशी ली गई। कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। सीडीओ ने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
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रविवार सुबह दस बजे प्रभारी डीएम (सीडीओ) संदीप कौर और एसपी महेंद्र पाल सिंह, एएसपी के नेतृत्व में कई सीओ, एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी समेत कई थानों की फोर्स और क्राइम ब्रांच की टीम ने अचानक छापा मारा तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने भोजनालय, हाई सिक्योरिटी बैरिक समेत पूरी जेल की सघन चेकिंग की।

एक बंदी के इशारे पर पुलिस ने जेल की बैरिक नंबर तीन के पास स्थित शौचालय से एक प्लास्टिक की थैली में एक पैकेट गांजा (करीब ढाई सौ ग्राम), करीब बीस ग्राम चरस, पान मसाला और 30 हजार रुपये बरामद किए। बैरिक के पास ही जमीन में गड्ढा खोदकर एक प्लास्टिक की थैली में एक मोबाइल सिम, दो मोबाइल चार्जर, तीन पेन ड्राइव बरामद की। प्रतिबंधित सामान की बरामदगी होते ही जेल के अधिकारी बगलें झांकने लगे।
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एसपी, प्रभारी डीएम और जेल अधीक्षक आरएन पांडेय की मौजूदगी में बरामद माल की लिस्ट बनाई गई और पूरा माल जब्त कर लिया गया। करीब पांच घंटे तक चली छानबीन के बाद अधिकारी बाहर निकले। प्रभारी डीएम संदीप कौर ने बताया कि जेल में जो भी अव्यवस्था मिली है और जो प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई है उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।

एसपी एमपी सिंह ने बताया कि बरामद माल को सदर कोतवाली में जमाकर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जो भी प्रतिबंधित सामान मिला है वह किसी बंदी के पास से नहीं बल्कि मिट्टी के गड्ढे और शौचालय से मिला है इसलिए किसी को नामजद नहीं किया जा सकता।

जेल का सायरन भी खराब
उन्नाव। बाहर निकलते समय एसपी और प्रभारी डीएम ने जेल गेट के ऊपर लगा इमरजेंसी सायरन चेक किया तो वह नहीं चला। एसपी ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए कहा कि अगर जेल में कोई बवाल या बंदियों में मारपीट हो जाए या और कोई आपात स्थिति आ जाए तो इसकी सूचना कैसे देंगे। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी।

एक बंदी ने खोल दी पोल
उन्नाव। अगर एक बंदी ने हिम्मत न दिखाई होती तो हमेशा की तरह इस बार भी जांच टीम जेल गेट से बाहर निकलकर यही कहती सब ठीक मिला। जेल की बैरिक में अपना शासन चलाने वाला एक दबंग बंदी अपना काला कारोबार चलाता है। इससे खुन्नस खाए दूसरे बंदी ने एसपी को प्रतिबंधित सामग्री के बारे में बताया। पुलिस ने चेक किया तो हकीकत सामने आ गई। वापस लौटते समय सूचना देने वाले बंदी ने एसपी को रोते हुए बताया कि उसने जो किया है इसके बाद अन्य बंदी उसकी जान ले लेंगे। इसपर एसपी और प्रभारी डीएम ने जेल अधिकारियों को हिदायत देते हुए बंदी की सुरक्षा करने के निर्देश दिए।

गड्ढा खोदने के लिए फावड़ा नहीं दिया
उन्नाव। छापामार कार्रवाई के दौरान जेल अधिकारियों ने जांच करने पहुंचे जिले के आला अधिकारियों का सहयोग नहीं किया। जमीन में दबाकर रखी गई प्रतिबंधित सामग्री निकालने के लिए एक फावड़ा तक मुहैया नहीं कराया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने बाहर से फावड़ा मंगवाकर गड्ढा खुदवाया।

सामने आई जेल प्रशासन की मिलीभगत
उन्नाव। चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित सामग्री बरामद होने के बाद अधिकारियों में यह चर्चा शुरू हुई कि जब सिम और चार्जर बरामद हुए हैं तो जेल में मोबाइल भी जरूर होंगे। हालांकि काफी तलाश करने के बाद भी मोबाइल नहीं मिले। चर्चा रही कि इसमें कारागार प्रशासन की मिलीभगत है।

जेल अधीक्षक बोले, बरामद सामग्री संवेदनशील नहीं
उन्नाव। जेल में चरस और गांजा की बिक्री ही नहीं मोबाइल का खुलकर प्रयोग किए जाने की पुष्टि होने के बाद भी जेल अधीक्षक आरएन पांडेय यही बताते रहे कि कोई संवेदनशील सामग्री नहीं बरामद हुई। उनके मुताबिक 29 जनवरी 2014 को जेल में हुए खूनी संघर्ष के बाद फरवरी में उन्होंने यहां कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद उन्होंने सघन तलाशी कराई थी जिसमें करीब 65 मोबाइल फोन के अलावा तमाम प्रतिबंधित सामग्री जमीन खोदवाकर निकलवाई थी। उनके मुताबिक यह वही पुरानी सामग्री है जो शायद पहले हाथ नहीं लग पाई। हालांकि शौचालय से प्रतिबंधित सामग्री बरामद होने के सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया।
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