भारतीय जनता पार्टी से दो बार विधानसभा सदस्य रहे बाबूलाल कुरील का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को पीजीआई में सुबह 9 बजे निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। आम समाज में अपनी साफ सुथरी छवि रखने वाले नेता के निधन की सूचना मिलते ही पूरा क्षेत्र शोकाकुल हो गया। उनकी अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव बांगरमऊ के जगतनगर से नानामऊ घाट के लिए मंगलवार को रवाना होगी। उनके परिवार में पत्नी विमला कुरील के अलावा चार बेटे व तीन बेटियां हैं।
भाजपा की टिकट से उन्होंने पहला चुनाव 1979 में बांगरमऊ विधानसभा सीट से लड़ा, जिसमें उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा के ही टिकट से सफीपुर विधानसभा से 1984 व 1989 में चुनाव लड़ा। पहली जीत उन्हें 1993 के विधानसभा चुनाव में मिली। इसके बाद 1997 में भी वह दोबारा विधायक चुने गए। विधायक बाबूलाल कुरील किसान, मजदूरों के मसीहा के रूप में उभरे। उनके व्यक्तित्व पर लोगों ने उन्हें दोबारा विधानसभा पहुंचाया।
उन्हें हर समुदाय से हमदर्दी रही। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें राजनैतिक जीवन को अलविदा कहना पड़ा। बांगरमऊ क्षेत्र के जगतनगर निवासी बाबूलाल कुरील ने विधानसभा सफीपुर में अपनी अच्छी छवि के साथ कुशल प्रतिनिधित्व का सिक्का जमाया।
बाबूलाल कुरील के सफीपुर स्थित मां शंकरी देवी मंदिर के सामने अंतिम दर्शन होेंगे। उसके बाद अंतिम यात्रा पैतृक गांव के लिए प्रस्थान करेगी। इस दौरान शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने के लिए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, भाजपा नेता आनंद अवस्थी समेत तमाम राजनैतिक लोग उनके आवास पर पहुंचे।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभान शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में सिविल लाइंस स्थित अनुराग अवस्थी के निवास पर बैठक हुई, जिसमें बाबूलाल कुरील के निधन पर संवेदना व्यक्त की गई व दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मा की शांति की कामना की गई। इस दौरान पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह, कमलकुमारी, अनुज मिश्र, अतुल अवस्थी आदि मौजूद रहे।
उधर, भाजपा प्रदेश मंत्री वीरेंद्र तिवारी ने भी पूर्व विधायक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। एमएलसी हृदय नारायण दीक्षित, भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम रावत, विधायक पंकज गुप्ता, जिला महामंत्री संजय शुक्ला, किशन पाठक समेत तमाम भाजपा नेताओं ने पूर्व विधायक के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।