पंजीकरण के लिए मशक्कत करते मरीज व तीमारदार। संवाद
उन्नाव। 40 लाख की आबादी की चिकित्सकीय जरूरतें पूरी करने वाले जिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं मरीजों को परेशान कर रही हैं। सोमवार को अस्पताल पहुंचे 2390 मरीज घंटों पंजीकरण काउंटर और ओपीडी के बाहर इंतजार करने को मजबूर रहे। भीड़ देखकर कई मरीज निराश होकर वापस भी लौट गए।
संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ जमा रही। पंजीकरण काउंटर पर मरीज और तीमारदार घंटों कतार में जमा रहे। जल्द पंजीकरण कराने को लेकर कई बार लोगों के बीच गहमागहमी भी हुई। मौके पर मौजूद कर्मियों ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया।
इस दौरान 2390 मरीजों ने ओपीडी पंजीकरण कराया। जिसमें 744 पुरुष, 680 महिलाएं, 540 किशोर और 426 किशोरियां शामिल रहीं। मरीजों की संख्या बढ़ने से ओपीडी का हाल भी बेहाल रहा। फिजिशियन और बाल रोग ओपीडी के बाहर मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे। यहां मौजूद राकेश, सत्यम, शोभित ने बताया कि अस्पताल में न तो बैठने की व्यवस्था है और न तो इंतजार करने की जगह है।
करीब आधा घंटे से ओपीडी के बाहर खड़े हैं हालांकि अब तक नंबर नहीं आया है। यहां से निकलकर दवा लेने पहुंचे मरीज भी बेहाल रहे। दवा वितरण कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी रही। काफी देर की मशक्कत के बाद दवा मिलने पर मरीजों ने राहत की सांस ली। डायग्नोस्टिक विंग का हाल भी बेहाल रहा। यहां खून की जांच कराने के लिए 213 मरीज पहुंचे। जिससे यहां इमारत में पैर रखने की जगह भी नहीं बची। भीड़ के कारण घंटों बाद भी जांच न होने पर कई मरीज निराश होकर वापस लौट गए।
बयान
सभी डॉक्टर व स्टाफ को मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए अस्पताल का निरीक्षण भी किया जाता है। किसी भी मरीज को परेशानी होने पर कार्यालय आकर संपर्क कर सकता है।
डॉ. एसके शुक्ला,सीएमएस, जिला अस्पताल