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जिला अस्पताल में इलाज कर रहे ‘नकली’ डाक्टर

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-जिला अस्पताल में बिना अनुमति मरीजों का इलाज कर रहे अंशुमान नाम के युवक से पूछताछ करते डीएम। - फोटो : amarujala
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उन्नाव। जिला अस्पताल में नकली डाक्टर इलाज कर रहे हैं। वे अस्पताल में कार्यरत नहीं है, लेकिन सरकारी डाक्टर के रूप में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वे मरीजों को दवा एवं जांच के नाम पर ठग रहे हैं। इसका खुलासा सोमवार देर रात डीएम की छापेमारी में हुआ। इस दौरान एक नकली  डाक्टर रंगेहाथ पकड़ा गया।

उसके चार साथी भाग निकले। जनरल वार्ड में एक पुरुष स्टाफ नर्स और एक वार्ड ब्वाय नशे में धुत मिला। आधी रात को शुरू हुई छापेमारी मंगलवार तड़के तक चली। डीएम के निर्देश पर सीएमएस ने बिना अनुमति जिला अस्पताल में इलाज कर रहे डाक्टर सहित पांच लोगों के  खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। नशे में मिले स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक पखवारा पूर्व दो महिलाओं की गलत इंजेक्शन से मौत हो गई थी। मामले की जांच एसडीएम सदर कर रही थीं। जांच में पता चला था कि बाहरी लोग वार्ड में मरीजों का उपचार कर रहे थे। इस पर सोमवार रात 11:30 बजे डीएम रवि कुमार एनजी अन्य अधिकारियों एवं कोतवाली पुलिस के साथ जिला अस्पताल पहुंचे।

  इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा बंद कर जांच पड़ताल शुरू की। वार्ड में डा. अमित श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट जय प्रकाश, वार्ड ब्वाय सुधीर, स्टाफ नर्स श्वेता को पूछताछ के बाद वार्ड से बाहर भेज दिया गया। अंशुमान सिंह समेत तीन अन्य युवक शराब के नशे में धुत मिले। डीएम ने सीएमएस डा. बीके द्विवेदी को तलब किया। सीएमएस भी अंशुमान व अन्य युवकों के विषय में जानकारी नहीं दे सके। कड़ाई से पूछताछ में अंशुमान ने बताया कि बीएचएमएस (होम्यौपैथ) की डिग्री लेने के बाद उसने 2011 में तीन माह अस्पताल में इंटर्नशिप किया था।

इसके बाद से वह लगातार अस्पताल में लोगों का इलाज करने और मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने का काम कर रहा है। डीएम के निर्देश पर सीएमएस डा. वीके द्विवेदी ने कानपुर के सजेती बम्हौरा निवासी अंशुमान पुत्र उसके साथ अस्पताल में बिना अनुमति मरीजों का इलाज करने वाले बीएचएमएस डिग्रीधारी मनीष चंद्र, मनीष यादव, संदीप, अरुण व एक अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। अंशुमान को गिफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश की जा रही है। इसी तरह जनरल वार्ड, महिला वार्ड के निरीक्षण के दौरान वार्ड ब्वाय मनीष और तीन तीमारदार नशे में धुत मिले। इस पर वार्ड ब्वाय को कोतवाली भेज दिया गया। उसके खिलाफ मंगलवार देर रात तक लिखापढ़ी नहीं की जा सकी है। विभागीय कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।

रैन बसेरे में अंदर से लगा था ताला
निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे में ताला लगा मिला। करीब 10 मिनट बाद सुपरवाइजर सर्वेश ने ताला खोला। इस पर डीएम ने उसे कड़ी फटकार लगाई। रैन बसेरे में दो युवक नशे की हालत में मिले। इन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया।

कैसे चलती है कमाई
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि नकली डाक्टर रात में अस्पताल आने वाले मरीजों के तीमारदारों से वसूली करते थे।  वे बाहर से दवाएं खरीदवाते थे। कोतवाली में दी गई तहरीर में भी इसका जिक्र किया गया है। जांच पड़ताल के दौरान एसडीएम मेधा रूपम को डाक्टर द्वारा लिखी कई पर्चियां बरामद हुई हैं। इन पर्चियों की जांच कराई जाएगी।

शासन को भेजेंगे रिपोर्ट: डीएम
डीएम रवि कुमार एनजी ने बताया कि इस घालमेल की सूचना काफी दिनों पहले मिली थी। इस पर गुप्त रूप से जांच कराई गई थी। पुष्टि होने के बाद सोमवार रात कार्रवाई की गई। विभाग के अधिकारियों और डाक्टरों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। बयान रिकार्ड कराए जा रहे हैं। साक्ष्य जुटाकर दोषी डाक्टरों और अफसरों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।


डाक्टर साथ लाते हैं कमाई के ‘सहयोगी’
इमरजेंसी वार्ड में हर डाक्टर के साथ रहता है सहयोगी
अनुराग मिश्रा
उन्नाव। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का आर्थिक शोषण कई सालों से हो रहा है। इमरजेंसी वार्ड में जिन डाक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है उनके साथ ही इंटर्नशिप की आड़ में लोग वार्ड में कब्जा जमाए रहते हैं। डाक्टर आराम करते हैं या घर चल जाते हैं और यह बाहरी लोग खुद को डाक्टर बताकर मरीजों का इलाज करते हैं।  
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन डाक्टर की ड्यूटी बदलती है। आठ आठ घंटे की शिफ्ट में डाक्टर और फार्मासिस्ट की ड्यूटी बदलती रहती है। वार्ड में जो डाक्टर ड्यूटी करते हैं वह अपनी सुविधा के लिए इंटर्नशिप करने वालों को साथ लेकर आते हैं। इमरजेंसी वार्ड में जब कोई मरीज आता है तो डाक्टर के स्थान पर इंटर्नशिप करने वाले ही अटेंट करते हैं और इलाज शुरू कर देते हैं। इस दौरान मरीज के तीमारदार को महंगी से महंगी दवाओं की पर्ची थमाई जाती है। यह दवाएं पहले से तय मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। सूत्रों के अनुसार डाक्टरों की मिलीभगत से यह खेल अस्पताल में कई सालों से चला आ रहा है। इस खेल में इमरजेंसी वार्ड का हर व्यक्ति शामिल होता है। आठ घंटे की ड्यूटी में इंटर्नशिप करने वाले जो भी रकम इ्कट्टा करते थे उसका ड्यूटी खत्म होने के बाद बंटवारा हो जाता था।
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क्राइम की घटनाओं में सबसे ज्यादा कमाई
सबसे ज्यादा कमाई मारपीट की घटनाओं में घायलों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने में होती है। मामूली सी खरोंच को भी मेडिकल रिपोर्ट में जानलेवा हमले सरीखा साबित करने में एक मेडिकल रिपोर्ट में 5 से 10 हजार रुपये लिए जाते हैं। यही नहीं अगर दूसरी पार्टी ने ज्यदा रकम दी तो यह लोग बिना चोटों के भी गंभीर चोटों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर देते हैं। रकम तय होने के बाद डाक्टर, अपने इन कमाई के सहयोगियों की तैयार की गई रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर उसे प्रमाणित कर देते हैं।
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