मौरावां (उन्नाव)। पुलिस भले ही पटाखों में आग लगने की बात कह रही है, लेकिन जानकार बताते हैं कि जिस तरह से एक बार में तेज धमाका हुआ है वह वह बारूद फटने से ही होता है। पटाखों में आग लगने से एक के बाद एक कई धमाके होते हैं। पूरे पटाखे एक साथ नहीं फटते हैं।
जिस जगह पर विस्फोट होने से श्रमिक की मौत हुई है वहां से 50 मीटर दूर नफीस की दुकान है, वहीं पर पटाखे बिक्री के लिए रखने की अनुमति है। जिस झोपड़ी में विस्फोट हुआ है वहां पटाखों के भंडारण का लाइसेंस नहीं था। आतिशबाजी के कारोबार से जुड़े गुड्डू, शुएब, राजू, दिलशाद ने बताया कि पटाखों में आग लगने पर धमाके काफी देर तक होते रहते हैं। कई पटाखे जमीन की सतह और आसमान की तरफ जाकर फूटते हैं, लेकिन बारूद में विस्फोट होने पर जितना भी बारूद किसी गत्ते या डिब्बे में होता है वह पूरा एक साथ फटता है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि नफीस अहमद को 12.500 ग्राम चायनीज पटाखे बेचने का लाइसेंस है। यह बिक्री लाइसेंस 26 अक्तूबर 2024 से 31 मार्च 2026 तक के लिए मान्य है। बताया कि वर्तमान में जिले में किसी को भी पटाखा बनाने का लाइसेंस नहीं दिया गया है।
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मृत श्रमिक 14 साल से कर रहा था काम
-अविवाहित था, माता-पिता की भी हो चुकी है मौत
मौरावां (उन्नाव)। पारा गांव के बाहर बारूद में विस्फोट की घटना में जान गंवाने वाला श्रमिक शिवचरण 14 साल से शकील के खेत में रखवाली और नफीस के आतिशबाजी कारखाने में काम कर रहे थे। अविवाहित थे और माता पिता की मौत के बाद से वह इसी झोपड़ी में ही रहते और यहीं सोते थे।
विस्फोट में जान गंवाने वाले शिवचरण के बड़े भाई रज्जन ने बताया कि शिवचरण तीन भाईयों में दूसरे नंबर के थे। उनका विवाह नहीं हुआ था। वह कई साल से शकील खां के खेतों में काम करने के साथ पर नफीस के गोदाम में काम करते थे। रज्जन के मुताबिक घटना की सूचना पर वह मौके पर पहुंचे तो भाई का शव बुरी तरह झुलसे और शरीर में दर्जनों स्थानों का मांस फटकर निकल चुका था। बाद में अग्निशमन विभाग की टीम ने उसे मिट्टी डालकर बंद कर दिया।
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तेज धमाके से बिगड़ी किसान की हालत, भर्ती
मौरावां (उन्नाव)। तेज धमाके से पास के खेत में मौजूद एक किसान की हालत बिगड़ गई। तेज सिर दर्द होने से उसे स्वास्थ्य केंद्र से लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
इसी गांव निवासी नीलेश (37) पुत्र अशाेक कुमार घटना के समय पास के ही अपने खेत की फसल में खाद डाल रहा था। तेज धमाके से उसके सिर में असहनीय दर्द शुरू हो गया। परिजनों ने उसे आनन-फानन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, बाद में लखनऊ रेफर कर दिया गया।
जिले में पटाखा बिक्री लाइसेंस पर एक नजर
तहसील-बिक्री दुकानें
सदर-33
सफीपुर-07
बागंरमऊ-14
हसनगंज-08
पुरवा-15
बीघापुर-32
कुल-109
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि झोपड़ी में रखे पटाखों में विस्फोट की बात सामने आ रही है। अनुमान है कि श्रमिक के बीड़ी पीते समय चिंगारी पटाखों में गिरने से उनमें आग लगी है। फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। उनकी जांच की जाएगी तो स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
जिले में हुईं बारूद व पटाखा विस्फोट की प्रमुख घटनाएं
13 मई 2019- सदर कोतवाली के हरदोई रोड स्थित दोस्तीनगर में चाय की दुकान में आग लगने से पास में अहमद अली की पटाखा दुकान में आग लगी, इसके बाद मोहम्मद अख्तर की दुकान भी जली।
25 जून 2024- पुरवा कोतवाली के बिछिया कस्बा में गुड्डू वेल्डिंग की दुकान में रखे बारूद व पटाखों में विस्फोट, बिजली विभाग के एसएसओ सुनील कुमार की मौत।
30 जून 2024- सोहरामऊ के बिलौरा गांव में ताहिर उर्फ पप्पू के घर में विस्फोट होने से आसपास के कई मकान दरक गए थे।
09 जुलाई 2024- बिहार थाना के पकराखुर्द में दुकान में रखे पटाखों में विस्फोट, बाहर सो रहे आतिशबाज अली अहमद की मौत।
29 अगस्त 2024- बारासगवर थानाक्षेत्र के करनईपुर गांव से बाहर आतिशबाजी के अवैध कारखाने में हुए विस्फोट में करनईपुर गांव निवासी बीना की उसी दिन मौत हो गई थी। बीना के पति सुनील की चार सितंबर को और वहां काम करने वाले भवानीखेड़ा निवासी सर्वेश उर्फ महतू की छह सितंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी।