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फरार बंदी और दो सिपाहियों पर रिपोर्ट

Tue, 19 May 2015 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। पुलिस अभिरक्षा से सोमवार को भागे बंदी और सुरक्षा में लगे दोनो सिपाहियों के खिलाफ कानपुर आरआई ने उन्नाव सदर कोतवाली रिपोर्ट दर्ज कराई है। दोनों सिपाहियों को निलंबित कर हिरासत में ले लिया गया है। तहरीर में उन्होंने माना है कि सिपाही जो सूचना दे रह हैं वह भ्रामक और संदिग्ध है। रिपोर्ट दर्ज कर फरार बंदी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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सितंबर 2011 को शहर के मोहल्ला आदर्श नगर में बिरयानी विक्रेता सुआ पुत्र राजेश की रंगदारी न देने पर शरेशाम हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में 16 सितंबर 2011 को ईदगाह पत्थर कालोनी निवासी अतीक पुत्र रफीक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। सोमवार को कानपुर जेल से उन्नाव सीजेएम प्रथम न्यायालय में पेशी पर अतीक को भेजा गया था।

बंदी की अभिरक्षा में सिपाही गोविंद सिंह और रामनरेश शुक्ला की ड्यूटी लगाई गई थी। सोमवार दोपहर को अतीक पुलिस जवानों को चकमा देकर फरार हो गया था। पुलिस पूरे दिन घटना से अनजान बनी रही। कानपुर पुलिस लाइन के आरआई  (प्रतिसार निरीक्षक) हरविजय सिंह ने सदर कोतवाली उन्नाव में दी तहरीर में बताया है कि सोमवार को आरक्षी गोविंद सिंह और रामनरेश शुक्ला की अभिरक्षा में अतीक को सुबह 8.45 बजे भेजा गया था।
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शाम को छह बजे पुलिस लाइन पहुंचे दोनों सिपाहियों ने बताया कि उन्नाव स्टेशन से पहले आउटर के पास अतीक उन्हें धक्का देकर भाग गया। आरआई के मुताबिक आरक्षियों का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने 100 नंबर डायल कर पुलिस कंट्रोलरूम को सूचना देने का प्रयास किया मगर फोन नहीं मिला। तहरीर में आरआई ने माना है कि आरक्षी जो बात बता रहे हैं वह भ्रामक और संदिग्ध है। क्योंकि अगर प्रयास किया जाता तो भाग रहा बंदी पकड़ा जाता और इसमें जनसहयोग भी मिलता। कोतवाली प्रभारी सतीश कुमार गौतम ने बताया कि बंदी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। सिपाहियों को कानपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

परेशान होकर अधिकारियों ने कानपुर शिफ्ट कराया था
उन्नाव। हत्या के आरोप में 16 सितंबर 2011 को जेल गए अतीक ने जेल में अपने साथियों के साथ खूब उधम किया था। अपने एक परिचित से छेड़छाड़ की शिकायत करा उसने जेल के अधिकारियों और बंदी रक्षकों पर दबाव बना लिया था। बताया तो यहां तक जाता है कि अतीक जेल के भीतर नशीले पदार्थों की बिक्री करने लगा था। जेल में हुए बवाल के बाद जेल अधीक्षक आरएन पांडेय की सिफारिश पर जिला कारागार से 47 उत्पाती बंदियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया गया था। 1 फरवरी 2014 को जिन 9 बंदियों को कानपुर जेल में शिफ्ट गया गया था उनमें अतीक भी था।

पेशी के दिन घर पर करता था ऐश
उन्नाव। पुुलिस सूत्रों और मोहल्ले के लोगों के मुताबिक अतीक जब भी पेशी पर आता था पूरे दिन घर पर परिवार के साथ रहता था और शाम को पेशी करने के बाद जेल चला जाता था। सोमवार को भी दोनों सिपाही अतीक को कानपुर से लेकर आए और उसके घर लेकर चले गए। दोपहर को दोनों सिपाही उसके घर के बाहर के कमरे में आराम कर रहे थे इसी दौरान अतीक घर के पिछले दरवाजे से भाग निकला। जानकारी होने पर सिपाहियों ने उसकी मोहल्ले में काफी खोजबीन भी की मगर कहीं पता नहीं चला। हालांकि दोनों सिपाही अब खुद को बचाने और अपनी करतूत छिपाने के लिए पेशी पर लेकर जाते समय चलती ट्रेन से कूदकर भाग जाने की कहानी गढ़ रहे हैं।

कर सकता है कोर्ट में समर्पण
उन्नाव। सूत्रों के मुताबिक कानपुर जेल में शिफ्ट किए जाने के बाद से अतीक काफी परेशान था। पिछली बार की तरह इस बार भी वह न्यायालय में समर्पण करने का प्रयास करेगा। हालांकि सदर कोतवाली पुलिस उसे जल्द ही गिरफ्तार किए जाने की बात कह रही है।
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