एआरटीओ कार्यालय में पसरा सन्नाटा।
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बड़े नोटों के जरिए बिजली बिल और वाहन का टैक्स जमा करने के लिए खोले गए काउंटर सोमवार को सन्नाटे में रहे। कर्मचारी तो पूरे दिन काउंटर पर मौजूद रहे लेकिन दोपहर तक एक भी लोग न तो बिजली बिल जमा करने पहुंचे और न टैक्स।
बड़े नोट बंद होने के बाद जनता को राहत देते हुए मोदी सरकार ने पेट्रोलपंप, रेल टिकट बुकिंग, सरकारी अस्पतालों के साथ ही एआरटीओ व बिजली बिल काउंटर पर 14 नवंबर तक 500 और एक हजार रुपये के नोट के जरिए बिल जमा करने की छूट दी थी। शुरुआती दिनों में तो कैश काउंटरों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी लेकिन आखिरी दिन सोमवार को दोनों कार्यालयों के कैश काउंटर तो खुले रहे लेकिन कैश जमा करने कोई नहीं पहुंचा। कार्तिक पूर्णिमा व गुरु नानकदेव जयंती की छुट्टी को देखते हुए दोनों कार्यालयों के कैश काउंटर सोमवार सुबह 10 बजे से ही खोल दिए गए थे लेकिन दोनों काउंटरों पर पूरा दिन सन्नाटा ही पसरा रहा। एआरटीओ के कैश काउंटर पर मौजूद राजकुमार ने बताया कि एक भी व्यक्ति कैश जमा करने नहीं पहुंचा। यही नजारा सिविल लाइंस स्थित बिजली बिल काउंटर का भी रहा। बतातें चलें कि बड़े नोट की पाबंदी के बाद से तीन दिनों के अंतराल में एआरटीओ में करीब 1 करोड़ की नकदी जमा हुई तो वहीं बकाया बिजली में लगभग 5.20 करोड़ रुपये जमा हुए।
उन्नाव। छोटे नोट की करेंसी की किल्लत से हर तरफ मारामारी मची हुई है। जिससे हालात यह हो गए हैं कि जेब में हजारों की नकदी होने के बाद भी लोग पेट्रोल, मोबाईल रिचार्ज के साथ ही अन्य दैनिक खर्च के लिए दिक्कतें उठा रहे हैं। सोमवार को छुट्टी के चलते बैंकों में तालाबंदी रही। छोटे नोट की तलाश में लोगों ने एटीएम की तरफ रुख किया तो यहां भी लोगों को कैश नसीब नहीं हो सका। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के एटीएम सोमवार को शोपीस बने रहे। बैंक बंदी के बीच एटीएम में भी कैश न होने से लोग सिस्टम को कोसते वापस लौटे।