उन्नाव। 10 गांव यूपीसीडा में जाने से यूएसडीए का अस्तित्व संकट में है। डीएम ने यूएसडीए का अस्तित्व बचाने के साथ ही उसके व्यापक विस्तार की कार्ययोजना तैयार की है। उन्होंने यह 10 गांवों के साथ ही उन्नाव ग्रामीण और शहर के आसपास के 87 गांवों को यूएसडीए में जोड़ने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
1983 से अस्तित्व में आए यूएसडीए (उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) के विकास क्षेत्र में 43 गांव शामिल किए गए थे। हालांकि बाद के वर्षों में विभिन्न विभागों की शासकीय अधिसूचनाओं के माध्यम से धीरे-धीरे 29 राजस्व गांव अन्य विभागों में सम्मिलित कर दिए गए। इससे यूएसडीए के अधिकार क्षेत्र में केवल 14 गांव ही बचे थे। मार्च 2021 में लीडा का विलय यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में होने से यूएसडीए के 10 गांव यूपीसीडा में चले गए।
इससे प्राधिकरण अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। हालात यह हैं कि वर्तमान में प्राधिकरण के पास नगर पालिका से भी कम क्षेत्र रह गया है। इसमें ज्यादातर क्षेत्र पहले से आबादित है। इससे प्राधिकरण के पास नई आवासीय योजनाओं, व्यवसायिक कांप्लेक्स के लिए जमीन ही नहीं बची है। लैंड बैंक खत्म होने से प्राधिकरण वर्षों से बेरोजगार है। जिलाधिकारी व उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गौरांग राठी ने बताया कि 1983 से प्राधिकरण में शामिल रहे 10 गांवों को पुन: शामिल कराया जा रहा है। शहर, गंगा एक्सप्रेसवे और कानपुर जिले से सटे परियर मार्ग के आसपास के 87 गांवों को शामिल करते हुए प्राधिकरण क्षेत्र का विस्तार करने का प्रस्ताव प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में पास कराकर शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया है।
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यूपीसीडा में गए हैं ये गांव
उन्नाव ग्रामीण, मुर्तजानगर, झंझरी, वाजिदपुर, गदनखेड़ा, सिंगरौसी, शेखपुर नरी, बंथर, कड़ेर पतारी, कटरी पीपर खेड़ा गांव को यूपीसीडा में शामिल कर दिया गया है।
मास्टर प्लान 2031 भी लटका
उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण अभी तक 1986 के मास्टर प्लान पर ही काम कर रहा है। बीच में वर्ष 2001 और 2011 में नया मास्टर प्लान नहीं बन पाया। इसके बाद वर्ष 2021 में प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष दिव्यांशु पटेल ने प्रयास कर प्राधिकरण का 3031 तक का मास्टर प्लान तैयार कराया। इसका प्रकाशन कर बोर्ड के सदस्यों और शहर वासियों से आपत्तियां और सुझाव लेकर जरूरी संशोधन कराते हुए अंतिम रूप दिया लेकिन इसके बाद प्राधिकरण के 10 गांव यूपीसीडा में चले जाने से करीब 90 फीसदी क्षेत्र कम हो गया और मास्टर प्लान अटक गया। मास्टर प्लान लागू होने से नए व्यावसायिक, आवासीय क्षेत्र और कांप्लेक्स बनते। 2031 तक शहरी क्षेत्र और उसकी आबादी के अनुसार सीवरेज, पेयजल, बिजली आदि सुविधाएं देने को आधार मानकर शहर का विकास होता।
पहले भी जा चुके हैं 29 गांव
यूएसडीए के क्षेत्र में आने वाले जिले के 29 गांवों को शासन के निर्देश पर वर्ष 1996 में गंगा बैराज के आसपास के 13 राजस्व गांवों को केडीए के विकास क्षेत्र में शामिल कर दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में गंगोत्री टाउनशिप योजना के लिए 16 और गांव दे दिए गए। इसी का नतीजा है कि कागजों में भले ही विकास प्राधिकरण का नाम यूएसडीए (उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) है लेकिन धरातल पर शुक्लागंज, उन्नाव प्राधिकरण में बचा ही नहीं है। 29 राजस्व गांव केडीए में जाने के बाद यूएसडीए की सीमा गंगाघाट नगर पालिका (शुक्लागंज) से करीब एक किलोमीटर पहले मरहला चौराहा तक ही बची है।