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ई-वालेट- व्यापार में मददगार, जानकारी व उपलब्धता का इंतजार

Mon, 19 Dec 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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स्वाइप मशीन का इस्तेमाल करते ग्राहक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बैंकबंदी के साथ खाली एटीएम से परेशान लोगों को दुकानदारों ने स्वाइप मशीन से सहारा दिया। लोगों के बैंक अकाउंट में तो लाखों जमा हैं, लेकिन खरीदारी को जेब में दो चार सौ रुपयों का संकट है। ऐसे में आनलाइन पेमेंट प्रक्रिया लोगों के लिए मददगार साबित हो रही। कैश की किल्लत से दम तोड़ रहा शहर का मार्केट अब कैशलेस की तरफ बढ़ा रहा है। रविवार को अमर उजाला ने मार्केट का हाल जाना तो ज्वैलर्स, रेडीमेड व सूटिंग-शर्टिंग के दुकानदार स्वाइप मशीन से कैश लेनदेन करते मिले। आनलाइन भुगतान कर रहे खरीदारों में इस बात को लेकर उत्सुकता भी दिखी अब वह लोग हाईटेक हो रहे हैं। दुकानदारों ने बताया कि बैंक के साथ ही एटीएम में कैश न होने से व्यापार लगभग ठप होने की स्थित में आ गया था। ऐेसे में स्वाइप मशीन व पेटीएम अहम साबित हो रहे हैं। साथ ही बताया कि आनलाइन कैश ट्रांसफर करने की लोगों में अभी हिचक काफी है। समय के साथ जिले का मार्केट भी कैशलेस होना तय है।
क्या कहते हैं कारोबारी
सराफा व्यापारी वेद प्रकाश गुप्त ने बताया कि करेंसी की किल्लत से व्यापार पूरी तरह ठप होने की स्टेज पर पहुंच गया था। लेकि न स्वाइप मशीन के प्रयोग से व्यापार का टर्नओवर घुमाने में काफी राहत मिली। कैशलेस भुगतान के प्रति लोगों में डर है। इसके लिए सरकार को बडे़ स्तर पर आनलाइन पेमेंट को जागरूकता अभियान चलाना होगा। साथ ही टैक्स का स्लैब एक तय करना चाहिए। मेडिकल स्टोर्स संचालक कपिल कुमार का कहना है कि  नोटबंदी के बाद दुकानदारी में कैश को लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। हालात यह हो गए कि दो-दो दिन तक हजार दो हजार की बिक्री की भी माथापच्ची रही। ऐसे में ई पेमेंट व स्वाइप मशीन काफी मददगार साबित हो रही। साथ ही आनलाइन कैश लेनदेन की सुविधा का लोगों में रुझान बढ़ा है। हर रोज 15 से 20 लोग आनलाइन पेमेंट कर रहे हैं।  बेकरी दुकानदार अंकित अरोड़ा ने बताया कि कैशलेस इकोनामी की तरफ देश को ले जाना सरकार का सराहनीय कदम है। मगर एकदम से यह संभव नहीं है। नोटबंदी की चोट से व्यापार का सिस्टम धड़ाम हो गया है। बैंकों में कैश नहीं तो लोगों के पास कहां से आए। ऐसे में मजबूरन ई पेमेंट सिस्टम से कदमताल करना पड़ा। जो अब काफी सुविधाजनक साबित हो रहा है। कपड़ा व्यापारी नीरज तनेजा ने बताया कि नोटबंदी से लोग खाली हाथ हैं। मार्केट में पैसा ही नहीं तो व्यापार का पहिया थमना लाजमी है। बैंकों के साथ ही एटीएम में कैश न होने से लोग खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। पहले लोग शौकिया शापिंग करते थे, लेकिन फिलहाल लोग जरूरत पूरी कर रहे हैं। पहले से कहीं ज्यादा लोग पेटीएम व स्वाईप मशीन से आनलाइन कैश लेनदेन कर खरीदारी कर रहे हैं।  टोल प्लाजा पर रोजाना हजारों का ‘ई पेमेंट’
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नोटबंदी के बाद नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स की अदायगी में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। सरकार ने टोल प्लाजा को ‘ई पेमेंट’ से लैस किया है। इसी के तहत नवाबगंज टोल प्लाजा भी आनलाइन लेनदेन से कदमताल कर रहा है। टोल पर पेटीएम, स्वाइप मशीन के साथ ही फास्ट टैग से आनलाइन पेमेंट करने की सुविधा वाहन चालकों को दी गई है। टोल प्रबंधक एस के चौहान ने बताया कि रोजाना तीन से चार हजार रुपये का आनलाइन लेनदेन से टोल टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।
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नहीं मिल पा रही स्वाइप मशीन
आरबीआई बैंकों को पर्याप्त करेंसी नहीं दे पा रही तो बैंक व्यापारियों को स्वाइप मशीन नहीं दे पा रही। पखवारे भर में शहर के आधा सैकड़ा से अधिक दुकानदारों ने स्वाइप मशीन के लिए आवेदन किया। मगर अभी तक बैंक का मार्केटिंग विभाग आवेदकों को स्वाइप उपलब्ध नहीं करा सका। दुकानदारों ने बताया कि बैंक मैनेजर दो-चार दिन में स्वाइप मशीन देने का आश्वासन दे रहे हैं। 
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