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Unnao News: पटाखों का शोर घटने से जोर नहीं पकड़ पाया प्रदूषण

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उन्नाव। इस बार दिवाली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण पिछले साल की तुलना में कम रहा। शहर के दो स्थानों पर प्रदूषण मापने के लिए लगाए गए यंत्रों की रिपोर्ट संतोषजनक आई है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर शहर में हर साल दीपावली से पहले और बाद में ध्वनि व वायु प्रदूषण के स्तर की जांच की जाती है। प्रदूषण का स्तर मापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के कृष्णा नगर और आईबीपी चौराहा के पास यंत्र लगाए थे। 31 अक्तूबर की रात वायु और ध्वनि प्रदूषण के स्तर की जांच की गई।
कृष्णा नगर में दीपावली से पहले 46.70 डेसिबल का शोर (ध्वनि प्रदूषण) रिकार्ड हुआ। 31 अक्तूबर को दीपावली की रात यह बढ़कर 57.58 हो गया। हालांकि पिछले साल दीपावली की रात 67.93 डेसिबल का शोर रिकार्ड किया गया था। शहर के कृष्णा नगर में दीपावली से पहले हवा (वायु प्रदूषण) में पीएम-10 का स्तर 96.91 रिकार्ड किया गया था। दीपावली वाली रात यह 105 रिकार्ड हुआ। वर्ष 2023 में दिवाली की रात पीएम-10 का स्तर 154.09 रिकॉर्ड किया हुआ था।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अनिल माथुर ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार दिवाली की रात ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर कम रहा है। 24 अक्तूबर से सात नवंबर तक रात-दिन के वायु व ध्वनि प्रदूषण के आंकड़े जुटाकर इनके औसत का आकलन किया जाएगा। इसके बाद दोनों प्रकार के प्रदूषण की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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ये है पीएम-10
वातावरण में पीएम-10 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक होने पर सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है। पीएम का स्तर बढ़ने से लोगों में सांस संबंधी रोग होने और पहले से इस रोग से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ने संभावना रहती है।
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प्रदूषण कम होने के यह रहे कारण
लोगों ने इस बार दिवाली में ग्रीन पटाखों पर जोर दिया। सामान्य पटाखों से करीब 25 फीसदी अधिक महंगे होने के बावजूद लोगों ने इन्हीं की खरीदारी को प्राथमिकता दी। जागरूकता के कारण तमाम लोगों ने ज्यादा आतिशबाजी के बजाए सिर्फ त्योहार पर बच्चों की खुशी के लिए कम पटाखे ही छुड़ाए। ग्रीन पटाखे छोटे साइज के होते हैं और वातावरण में राख नहीं छोड़ते। इन पटाखों को डस्ट रिप्रेसेंट मिलाकर बनाया जाता है ताकि वायु प्रदूषण कम हो और रोशनी ज्यादा रहे। इनसे ध्वनि प्रदूषण भी कम होता है। शहर वासियों में दीपक सिंह, राजीव शुक्ला, दिनेश तिवारी, मयंक सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए दिवाली मनाई। तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनाई। ग्रीन पटाखों पर ही इस बार जोर दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल माथुर ने बताया कि इस समय ऋतु में बदलाव हो रहा है। वायु मंडल की ठंडी हवा का दबाव धरती की तरफ बढ़ रहा है। इसी वायु दबाव की वजह से धूल और धुआं नीचे की तरफ रहता है और हमें धुआं और धुंध दिखाई देती है। इस बार दिवाली की रात मध्यम गति की हवा चलने से धुंआ व धुंध की वायुमंडल में पर्त नहीं बन पाई। प्रदूषण का स्तर कम रहने की एक वजह यह भी सामने आई है।
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