उन्नाव। सदर तहसील क्षेत्र के कड़ेर पतारी ग्राम पंचायत के मजरे जालिमखेड़ा के किसानों के सामने परिवार के भरणपोषण के लिए गांव से पलायन करने की नौबत आ गई है। यहां पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने नियम विरुद्ध एक पुलिया को बंद कर दिया। इससे जल निकासी न होने से पानी किसानों के खेतों में भर गया है। किसानों की धान की फसल डूब चुकी है। आगे गेहूं बुआई होने की स्थिति नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों ने लेखपाल पर विपक्षियों से मिलकर अब तक पुलिया न खुलवाने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को जालिमखेड़ा के सुशील के साथ प्रेमवती, शिवकांती, निर्मला, मीरा देवी, शांति देवी आदि कलक्ट्रेट पहुंचीं। सभी ने डीएम के न मिलने पर ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। बताया कि पांच प्रभावशाली लोगों ने अवैध तरीके से बारिश व गांव के निकलने वाले पानी की निकासी पुलिया को जबरन बंद कर दिया है। इसके चलते पानी पुलिया से आगे न जाकर पीछे उनके खेतों में भर रहा है। जिससे पूरी धान की फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई है। जब पुलिया खोलने का प्रयास किया तो वह लोग जान माल की धमकी देते हुए झगड़ा करने लगे।
बदरका पुलिस चौकी में शिकायत की लेकिन पुलिस ने पुलिया नहीं खुलवाई। पूर्व में शिकायत की तो तहसीलदार अविनाश चौधरी, नायब तहसीलदार पूर्णिमा तिवारी व लेखपाल सत्यम शर्मा 10 अक्तूबर को जांच करने पहुंचे थे। जांच के बाद अधिकारियों ने समझौता पत्र तैयार कराया। इसमें विपक्षियों ने पुलिया खोलने में किसी प्रकार की आपत्ति न होने की बात कही। अधिकारियों ने लेखपाल को पुलिया खुलवाने का आदेश दिया लेकिन 12 दिन बीत गए लेकिन आज तक पुलिया नहीं खुल पाई।
आरोप लगाया कि अब लेखपाल की विपक्षियों से मिलीभगत है और वह फोन नहीं उठा रहे हैं। जबकि उन लोगों के सामने अब परिवार का भरणपोषण करने की समस्या खड़ी हो गई है। गेहूं की फसल बोने को नहीं मिली तो गांव के पुरुष यहां से पलायन करने को मजबूर होंगे। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने उन्हें एसडीएम सदर के पास जाने की सलाह देकर लौटा दिया।