सूखे का आंकलन करने आई केंद्रीय टीम ने जिले के कई गांवों में खेतों पर जाकर निरीक्षण किया। खेतों का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद टीम के अधिकारियों ने भी माना कि जनपद सूखे की चपेट में रहा है। फसलें बर्बाद हुई हैं। उत्पादन गिरने से किसानों को तगड़ी आर्थिक चोट पहुंची है। ऐसे में किसान राहत पाने के हकदार हैं।
केंद्रीय सूखा आयुक्त एवं उप सचिव कृषि मंत्रालय भारत सरकार राघवेंद्र सिंह प्रदेश तथा कृषि बीमा एवं सांख्यिकी विभाग के निदेशक पीके सिंह जिले में सूखे का आंकलन किया।
उन्होंने सबसे पहले हसनगंज के ख्वाजगीपुर गांव को देखा। दोनों अधिकारियों ने खेतों पर जाकर स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने किसानों से फसलों के उत्पादन के बारे में पूछा। तत्पश्चात नवाबगंज ब्लाक के बिचपरी गांव पहुंचे।
जांच पड़ताल के बाद खाद्य आयुक्त शहर के अब्बासपुर, दोस्तीनगर व राजेपुर पतारी गांव गए। पतारी गांव में किसान से जानकारी ली तो पता चला कि उसने डेढ़ बीघे में धान फसल बोई थी। सूखा पड़ने से तीन क्विंटल ही धान हुआ। अन्य गांवों में भी किसानों ने सूखे से हुए नुकसान की जानकारी ली।
निरीक्षण के बाद दोनों अधिकारियों ने पाया कि जिले में सूखे से किसानों को तगड़ा नुकसान हुआ है। कहा कि सूखा पड़ने से 40 से 55 फीसदी क्षति फसलों को हुई है। आयुक्त ने कहा कि वह इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपेंगे।
कृषकों को डीजल पर सब्सिडी के लिए भेजे प्रस्ताव- केंद्रीय खाद्य आयुक्त ने निरीक्षण दौरान डीएम सौम्या अग्रवाल से कहा कि सूखा पड़ने से किसानों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में किसानों को राहत की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कृषकों को डीजल पर सब्सिडी दिलाने को वह प्रस्ताव प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजें। केंद्र सरकार इस पर विचार करेगी। इसके अलावा किसानों को मुआवजे के लिए भी जल्द रिपोर्ट भेजें।
बारिश कम होने के साथ ही नहरों से नहीं मिला पानी- दोनों अधिकारियों ने जब किसानों से फसलों के उत्पादन के बारे में जानकारी ली तो कुछ कृषकों का सिंचाई विभाग के अफसरों के प्रति भरा गुस्सा फूट पड़ा।
किसानों ने कहा कि प्रकृति की मार से बेहाल उन लोगों को सिंचाई विभाग से भी बेरुखी मिली। नहरों में समय पर पानी नहीं आया, जिससे उनकी फसलें सूखती चली गईं।
बारिश की जानकारी करने के बाद अधिकारियों ने बताया कि जून में मात्र 53 फीसदी ही बारिश हुई। सितंबर में बारिश का आंकड़ा 18 फीसदी रहा। जब धान की बाली निकल रही थी, तब बारिश नहीं हुई। इस कारण उत्पादन कम हुआ।
अफसरों पर लगाया पक्ष न सुनने का आरोप- बिचपरी गांव के किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। अफसरों ने केवल प्रधान के घर पर ही बैठकर रिपोर्ट तैयार कर ली। किसान अमरपाल व गुरु प्रसाद ने कहा कि अधिकारियों ने किसी से भी बात नहीं की।
वहीं पतारी गांव में भी केंद्रीय सीनियर अधिकारी गाड़ी में बैठे रहे और जूनियर अफसर ने फौरी तौर पर खेतों का निरीक्षण किया। इससे किसानों में अधिकारियों की कार्यशैली के प्रति आक्रोश दिखा।
खेत हुए खाली तब आए करने निरीक्षण- किसानों का कहना था कि अधिकारी उस समय निरीक्षण करने पहुंचे, जब अधिकांश खेत खाली हैं। किसानों ने गेहूं की फसल बो दी है। ऐसे में सूखे का वास्तविक आंकलन नहीं हो सका है।
अधिकारियों को उस समय आना चाहिए था जब खेतों में धान की फसल खड़ी हुई थी। उस समय नुकसान की असली तस्वीर दिखाई देती।