उन्नाव। उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण ( यूएसडीए) ने गुरुवार को निराला प्रेक्षागृह में डीएम रवींद्र कुमार की मौजूदगी में शहर के सुनियोजित विकास के खाका का प्रस्तुतीकरण कराया। बताया गया कि भावी महायोजना में औद्योगिक व पर्यटन विकास को भी तवज्जो दी जाएगी। इसमें विभागाध्यक्षों व रियलस्टेट कारोबारियों से सुझाव और आपत्तियां देने को कहा गया।
एजेंसी मेसर्स रुद्राभिषेक इंटरप्राइजेज की सहायक महाप्रबंधक गार्गी असाटी की देखरेख में हुए प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि भावी महायोजना में औद्योगिक व पर्यटन विकास को भी तवज्जो दी जा रही है। भूगर्भित जल संरक्षण के मद्देनजर तालाबों को संरक्षित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। नगरीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लान, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सीवर व्यवस्था के प्रावधानों पर भी जोर दिया जाना है। डीएम ने विभागाध्यक्षों से कहा कि वह तीन दिन में सुझाव व सूचनाएं प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं, जिससे उन्हें महायोजना में उन्हें शामिल किया जा सके। सदर विधायक पंकज गुप्त ने महायोजना तैयार किए जाने में जन सहभागिता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्षों व जनप्रतिनिधियों के सुझावों के साथ आम लोगों से आपत्तियां व सुझाव लिए जाने चाहिए। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्रीकांत मिश्र ने डीएम व विधायक का स्वागत किया। सचिव अधीक्षण अभियंता आरडी वर्मा ने समापन पर सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर जिला उद्योग केंद्र की उपायुक्त सविता रंजन भारती, जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रभागीय निदेशक वन, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी व जल निगम सहित अन्य विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।
शासन ने जून 1983 में प्राधिकरण का गठन करते हुए शहर का सुनियोजित विकास कराने का जिम्मा सौंपा था। स्थापना के चार साल बाद वर्ष 1987 में महायोजना लागू करते हुए वर्ष 2001 तक इसमें शामिल प्रावधानों पर अमल कराया जाना था, लेकिन समय-समय पर तैनात रहने वाले अधिकारियों की उदासीनता से ऐसा संभव नहीं हो सका। वहीं नई महायोजना तैयार करने के लिए प्राधिकरण की ओर से भेजे जाने वाले प्रस्तावों को शासन की ओर से कभी तवज्जो नहीं मिली। वर्षों पूर्णकालिक उपाध्यक्ष व सचिव तैनात नहीं रहे। इससे प्रभारी बने तत्कालीन डीएम ने उपाध्यक्ष रहते हुए मातहत प्रशासनिक अधिकारियों को सचिव बनाए रखा। इसलिए पैरोकारी के अभाव से 2001 की महायोजना को 2021 तक जारी रखा गया।
प्राधिकरण की ओर से पूर्व की महायोजना में कोई सड़क व्यावसायिक न होने के बाद भी शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने वालों के प्रति उदासीनता बरती जाती रही। इसलिए तमाम आवासीय भवनों का व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है। इमारतों का निर्माण कराने वालों पर पार्किंग विकसित कराने को भी प्राधिकरण ने तवज्जो नहीं दी। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में यहां कोई नई आवासीय या व्यावसायिक योजना पर काम नहीं शुरू हो सका है। प्राधिकरण के साथ शासन को नक्शे न पास कराए जाने से करोड़ों रुपये राजस्व क्षति पहुंचाई जाती रही।