गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने भी सख्त रुख अख्तियार किया है। जिले की 38 टेनरियों को गंदे पानी की निकासी को 50 फीसदी घटाने के निर्देश दिए है। उधर, औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी और बंथर स्थित सीईटीपी (कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को अपग्रेड करने के लिए 150 करोड़ की योजना तैयार की गई है।
एनजीटी के मानकों को पूरा न करने पर यूपीसीबी के निर्देश पर जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने सीईटीपी दहीचौकी और बंथर से जुड़ी 38 टेनरियों को गंदे पानी की निकासी को आधा करने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का साफ कहना है कि इसके लिए टेनरियों को उत्पादन घटाना पड़े तो भी यह करना होगा। इसके साथ ही टेनरी संचालकों को गंदे पानी की निकासी वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाने को निर्देश दिए गए हैं। इनमें सीईटीपी दही चौकी से जुड़ी 14 और सीईटीपी बंथर से संबद्ध 24 टेनरियां शामिल हैं।
150 करोड़ से अपग्रेड होंगे सीईटीपी
सीईटीपी संचालन प्रभारी डॉ. सुभाष अवस्थी ने बताया कि दोनों सीईटीपी को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। दोनों पर 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें दही चौकी सीईटीपी को अपग्रेड करने पर करीब 50 करोड़ रुपये और बंथर सीईटीपी पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च आएगा।
टेनरियों के गंदे पानी की निकासी आधी हुई
सीईटीपी प्रभारी ने बताया कि टेनरियों के गंदे पानी की निकासी को आधा करा दिया गया है। दहीचौकी सीईटीपी प्रतिदिन 20 लाख लीटर (2 एमएलडी) पानी आता था लेकिन अब 10-11 लाख लीटर ही पानी आ रहा है। वहीं बंथर सीईटीपी में औसतन 30 लाख लीटर (3 एमएलडी) के स्थान पर अब 15-16 लाख लीटर ही पानी आ रहा है। उसे पूरी तरह साफ करने के बाद ही गंगा में छोड़ा जा रहा है।
रखी जा रही है नजर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कि प्रदूषित पानी गंगा नदी में न जाए इसपर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि टेनरियों के जल उत्प्रवाह को 50 फीसदी कम करा दिया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी नजर रखी जा रही है। कोई भी गड़बड़ी करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।