बीघापुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए गए निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों ने अप्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा ऑपरेशन और अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पुलिस ने अस्पताल संचालक समेत तीन लोगों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
बिहार थाना क्षेत्र के रामपुर खरही गांव निवासी बिट्टो (24) को शनिवार को प्रसव पीड़ा हुई। आशा बहू सुशीला के कहने पर उन्हें पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। फिर आशा बहू ने बेहतर इलाज का दावा कर बिट्टो को न्यू मां हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शनिवार रात बिट्टो ने एक बेटी को जन्म दिया। नवजात की हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रविवार सुबह बिट्टो की तबीयत अचानक खराब हुई और उसकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर हंगामा और तोड़फोड़ की। पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराया। मृतका के पति की तहरीर पर अस्पताल संचालक दीपक पटेल, शिवेंद्र पटेल और आशा बहू सुशीला पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
आशा बहू पर कमीशन का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया है कि आशा बहू सुशीला ने पहले बिट्टो को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। बाद में उसने बेहतर इलाज का दावा कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों का कहना है कि आशा बहू ने कमीशन के लालच में ऐसा किया। निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद नवजात और प्रसूता दोनों की हालत बिगड़ती गई।
सील होने के बाद भी चलता रहा अस्पताल
स्थानीय लोगों के अनुसार, न्यू मां हॉस्पिटल को 21 फरवरी 2026 को सील किया गया था। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी ने जांच में अस्पताल में पंजीकरण और डॉक्टर नहीं पाए थे। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन लगातार जारी था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अजय कुमार शर्मा ने मामले की जानकारी मिलने पर जांच के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र कुमार और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी पंकज पांडेय को जांच के निर्देश दिए गए हैं।