उन्नाव। एनआरएलएम में हुए 3.85 करोड़ के गबन में शासन को भेजी गई रिपोर्ट पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच में दोषी पाए गए जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) को हटाकर संयुक्त सचिव ने ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय लखनऊ में संबद्ध तिया है। वहीं, जिला मिशन प्रबंधक (डीएमएम) पर भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार दोनों पर एफआईआर और रिकवरी के आदेश हो चुके हैं। आयुक्त स्वत: रोजगार को तहरीर देने के लिए कहा गया, लेकिन वह कोतवाली नहीं पहुंचे।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना (एनआरएलएम) में वित्तीय वर्ष 2023-24 में अभियान चलाकर गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, नए समूह गठित करने व महिलाओं को रुचि और योग्यता के आधार पर प्रशिक्षण देने की योजना शुरू हुई थी। इसके लिए 18 अप्रैल 2023 से 30 जून 2023 तक जिले में अभियान चलाया गया था। शासन ने प्रति समूह 10 हजार रुपये निर्धारित करते हुए 3558 समूहों के लिए 3.85 करोड़ रुपये जारी किए थे। लेकिन निजी वेंडरों और कानपुर, उन्नाव और चित्रकूट की फर्मों के खातों में भुगतान करके रकम हजम कर ली गई।
एबी नगर निवासी कांग्रेस नेता अक्षत ठाकुर ने डीएम व प्रभारी मंत्री से इसकी शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा ने चार सदस्यीय टीम से जांच कराई, जिसमें 3.85 करोड़ का गबन मिला था। इस पर 23 मार्च 2025 को डीडीओ संजय पांडेय और एनआरएलएम की जिला मिशन प्रबंधक शिखा मिश्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई व डीएमएम को सेवा से हटाने की संस्तुति कर रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास को भेजी गई थी।
25 अप्रैल को ग्राम्य विकास अनुभाग से डीडीओ की पदोन्नति आदेश आया था। लेकिन एक मई जारी हुए दूसरे पत्र में उन्हें आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय लखनऊ में संबद्ध करना उल्लेख है। सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि शासन से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।