चार दिनों से एसबीआई में कैश की कमी है। इससे एक बार फिर नोटबंदी के दर्द का अहसास खाताधारकों को है। सहालग के समय में बैंक में करेंसी न होना कई परिवारों के लिए परेशानी का सबब साबित हो रहा है। जो फिलहाल 48 घंटे तक सामान्य होते नजर नहीं आ रहा है।
सूत्रों की मानें तो एसबीआई की तिजोरी में 2000, 500 व 100 रुपये की करेंसी ही नहीं है। जिसके कारण छोटी करेंसी से जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। जो जरूरतमंदों की आवश्यकताओं के सामने नाकाफी हैं। बड़ी करेंसी का नोट न होने से ही लगातार छठवें दिन एसबीआई के एटीएम शोपीस बने रहें। एसबीआई अफसरों की मानें तो आरबीआई ने अब 15 अप्रैल तक करेंसी देने का आश्वासन दिया है।
करीब ढाई माह पहले एसबीआई मुख्य शाखा ने आरबीआई से 200 करोड़ की करेंसी की डिमांड की थी। जो अभी तक आरबीआई की तरफ से पूरी नहीं की जा सकी है। लंबे समय से करेंसी न आनेे से बैंक शाखाओं में करेंसी का टोटा हैं। हालात यह हो गए कि एसबीआई मुख्य शाखा के पास बड़े नोट ही नहीं हैं। जो नगदी है भी वह 10, 20 व 50 रुपये की हैं। सोमवार से शुरू हुई करेंसी की कमी गुरुवार को और अधिक गंभीर हो गई। जिले की 60 शाखाओं व 22 एटीएम में कैश उपलब्ध कराकर खाताधारकों को कैश मुहैय्या कराने वाली एसबीआई मुख्य शाखा की स्थित भी बिगड़ चुकी है।
गुरुवार को बैंक मैनेजर दीपेंद्र यादव खाताधारकों को थोड़ा बहुत कैश लेने की अपील कर रहे थे। वहीं एक-दो दिन में सब सामान्य हो जाने की जानकारी भी कही। एक बैंक अधिकारी ने 15 अप्रैल शाम तक आरबीआई से कैश मिलने की उम्मीद जगाई है। इसके अलावा पीएनबी, यूनियन बैंक, ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त व एचडीएफसी में भी कैश की किल्लत से खाताधारकों को जूझना पड़ा। हर तरफ करेंसी की कमी से गुरुवार को खाताधारक परेशान रहे। लोगों ने एक दूसरे से उधार व्यवहार कैश लेकर जैसे तैसे अपने काम निपटाने को कहा।
एसबीआई एटीएम छठें दिन भी शोपीस
एसबीआई मुख्य शाखा की तिजोरी में बड़ी करेंसी के नोट न होने के कारण शनिवार को ही कैशलेश हो गए थे। जो क्रम गुरुवार तक बदस्तूर जारी है। बैंकों के साथ ही एटीएम बूथों में कैश न होने से खाताधारकों की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। एसबीआई के साथ ही गुरुवार को पीएनबी, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा व बैंक आफ इंडिया के एटीएम भी गुरुवार को शोपीस बने रहे। खाताधारक बड़ी उम्मीद के साथ बूथ पर जाते और मायूस होकर लौटते।