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लाखों नहीं, यहां करोड़ों के हुए वारे-न्यारे

Mon, 04 Jul 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला युवा कल्याण विभाग के कार्यालयाध्यक्ष की आईडी पासवर्ड से लाखों रुपये का गबन करने वाले
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के इस पैसे से जमीनें खरीदने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि बाबू पिछले एक माह से रजिस्ट्री विभाग के चक्कर काट रहा था। आसपास के स्टूडियो से खुद की कई फोटो भी खिंचाई। यही नहीं जिस फर्म के नाम बाबू ने पैसा ट्रांसफर किया वह फर्म कविता स्पोर्ट्स उसकी पत्नी के नाम से है।
मालूम होकि हिलौली ब्लाक के बचुआखेड़ा गांव में मिनी स्टेडियम निर्माण के लिए शासन ने 2 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे। इसमें पहली किश्त पूर्व में जारी हो चुकी थी। पहली किश्त से हॉल, खेल मैदान और साइड में सीसी रोड बनवाई गई थी। गार्ड कक्ष के अलावा कई अन्य कार्य अधूरा पड़े हुए हैं। इसके निर्माण के लिए द्वितीय किश्त के रूप में 97 लाख 5 हजार रुपये इसी साल जनवरी/फरवरी माह में जारी हुए थे। यह पैसा युवा कल्याण विभाग के खाते में आया था। विभागीय कार्यालयाध्यक्ष को यह धनराशि कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को देनी थी लेकिन युवा कल्याण के बाबू रामेंद्र ने कार्यालयाध्यक्ष की आईडी व पासवर्ड के जरिए यह पैसा खुद के व्यक्तिगत खाते और कविता स्पोर्ट्स के खाते में ट्रांसफर कर धनराशि गबन कर ली। वहीं निर्माण की कार्यदायी संस्था को तीन बार चेक दे दी। तीनों बार चेकें बाउंस हुई तो संस्था के अधिकारी ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके बाद मामला जिला युवा कल्याण अधिकारी मेघना सोनकर की जानकारी में आया। इस पर उन्होंने मामले की जानकारी डीएम को दी। डीएम के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू की। हालांकि शनिवार को पुलिस के कार्यालय पहुंचने से पहले बाबू वहां से फरार हो गया। सूत्र बताते हैं कि बाबू रामेंद्र ने इस धनराशि से शहर के अंदर और बाहर कई जमीनें खरीदी हैं। पिछले एक माह के दौरान उसने कई जमीनों की रजिस्ट्री कराई है। हालांकि अभी इस मामले में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सभी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
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विकास भवन में खड़ी बाबू की बाइक भी  गायब
शनिवार को कार्यालय से भागते समय बाबू ने अपनी बाइक विकास भवन में ही छोड़ दी थी। सूत्रों की मानें तो देरशाम पहले उसकी बाइक की नंबर प्लेट खोली गई। रविवार सुबह कुछ पुलिसकर्मियों को बाइक की निगरानी में लगाया गया था, लेकिन पुलिसकर्मियों की नजरों से बचकर कोई बाइक निकाल ले गया।


युवा कार्यालय का कनिष्ठ लिपिक रामेंद्र काफी शातिर किस्म का है। उसने पहले अधिकारी का भरोसा जीता फिर उनको ट्रेजरी द्वारा जारी किया गया आईडी पासवर्ड हासिल किया। धीरे-धीरे सरकारी खाते से अपने व्यक्तिगत व फर्म के खाते में पैसा ट्रांसफर करता रहा। सूत्रों का कहना है कि मिनी स्टेडियम के लिए आई धनराशि के अलावा भी बाबू ने विभागीय खाते में विभिन्न मदों के लिए आए पैसे पर भी हाथ साफ किया है। खुद डीएम सौम्या अग्रवाल ने भी इसे स्वीकार किया है। उनका कहना है कि आरोपी बाबू के विभागीय खाते में आई धनराशि के भी गबन करने की जानकारी हुई है। मामले की विस्तृत जांच के बाद ही कितनी धनराशि हड़पी, इसका खुलासा हो पाएगा।

पासवर्ड की जानकारी कहीं महंगी न पड़ जाए
जिला कोषागार (ट्रेजरी) की ओर से युवा कल्याण अधिकारी को आईडी पासवर्ड जारी किया गया था। यह काफी गोपनीय होता है। नियमानुसार, आईडी पासवर्ड का प्रयोग उसको ही करना चाहिए जिसके नाम यह जारी किया जाए। इसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारी की होती है। ऐसे में बाबू को जिला युवा कल्याण अधिकारी मेघना सोनकर ने अपनी आईडी व पासवर्ड दी या उसने अन्य किसी तरीके से इसे हासिल किया, इसका खुलासा तो जांच के बाद ही होगा, लेकिन एक बात तो तय है कि कार्यालयाध्यक्ष को बाबू पर जरूरत से ज्यादा विश्वास महंगा पड़ सकता है।

कार्यालय के बाहर तैनात रहे पीआरडी जवान
रविवार को जिला युवा कल्याण कार्यालय तो बंद रहा, लेकिन बाहर पांच पीआरडी जवान तैनात रहे। कार्यालय से गबन संबंधित अभिलेख व कंप्यूटर आदि की चोरी न हो जाएं, इसके लिए जवानों को कक्ष की निगरानी के लिए तैनात किया गया। वहीं रविवार छुट्टी के दिन भी विकासभवन में कुछ कार्यालय खुले थे। सभी में मामले में बाबू के अलावा कई अन्य के भी शामिल होने की आशंका जताते रहे।
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पुलिस की दबिश में हत्थे नहीं चढ़ा बाबू
गबन का आरोपी बाबू रामेंद्र सिंह शहर के आदर्शनगर मोहल्ले में रहता है। पुलिस ने शनिवार देर रात उसके घर में दबिश दी, लेकिन बाबू नहीं मिला। घर पर पत्नी व बेटी थी। आरोपी की मां अपनी बेटी के यहां गई है। कोतवाल संजय पांडेय ने बताया कि घर में छापेमारी के दौरान बाबू पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। संभावित स्थानों पर दबिशें दी जा रही हैं।
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