एक करोड़ की फिरौती के लिए विनोद की हत्या ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ा दी। वारदात से गुस्साए लोगों ने सड़क पर उतरकर चौबीस घंटे तक जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार शाम शव आने के बाद लोगों ने उन्नाव-संडीला मार्ग जाम कर एसपी और डीएम को मौके पर बुलाने की मांग की। एसपी तो रात में पहुंची पर डीएम ने बिगड़े हालातों की कोई परवाह नहीं की। प्रदर्शन समाप्त न होने पर गुरुवार डीएम ने गांव पहुंच कर परिवारीजनों को समझाने का प्रयास किया। पांच लाख का मुआवजा, मृतक भाइयों की पत्नी को विधवा पेंशन, घटना की जांच और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के आश्वासन पर प्रदर्शन शांत हुआ। देर शाम परिजनों ने विनोद के शव का अंतिम संस्कार किया।
विनोद की अपहरण के बाद हत्या और बड़े बेटे आजाद की मौत से आक्रोशित परिजनो ने बुधवार शाम उन्नाव-संडीला मार्ग पर विनोद का शव रखकर प्रदर्शन शुरू किया। एसपी नेहा पांडेय पूरे जिले की फोर्स के साथ मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश शुरू की। परिजन घटना की सीबीआई जांच, पूरे थाने को सस्पेंड करने और दोषी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। एसपी ने उनकी मांगों को स्वीकार कर प्रदर्शन समाप्त करने की बात कही। प्रदर्शन कर रहे लोगों एसपी से कार्रवाई को लिखित तौर पर देने की मांग की। रात 12 बजे तक पुलिस और ग्रामीणों में बहस छिड़ी रही। ग्रामीण डीएम को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। बाद में एसपी ने कार्रवाई के लिए लिखित आश्वासन दिया।
गुरुवार सुबह हत्यारोपियों को औरास थाने लाने की मांग कर लोगों ने फिर से प्रदर्शन उग्र कर दिया और अंतिम संस्कार न करने का निर्णय लिया। मौके पर पहुंचे एसडीएम प्रशांत भारती व सीओ बांगरमऊ आरपी सिंह ने थाने चलकर आरोपियों से बात करने की बात कही। जिस पर परिवार के लोग थाने पहुंच गए। आरोपियों से न मिलाकर उन्हें बिठाए रखा गया और डीएम व एसपी को बुला लिया गया। सूचना पर एसपी नेहा पांडेय और डीएम सौम्या अग्रवाल दल-बल के साथ थाने पहुंची। इसी बीच करीब एक सैकड़ा लोग थाने पहुंच गए। पुलिस ने लाठियां पटक कर भीड़ को तितर-बितर किया। डीएम ने मृतक के पिता रामसेवक से बात की तो उन्होंने कहा कि सही मुल्जिमों को सजा मिले। डीएम ने शासन स्तर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
कृषि बीमा योजना से पांच लाख रुपये और दोनों बहुओं को विधवा पेंशन का आश्वासन मिलने पर पिता ने शव के अंतिम संस्कार की हामी भरी । तभी मृतक का दूसरे परिजन फैसले से आक्रोशित हो गए और अंतिम संस्कार न करने की बात कही। डीएम ने समझाने का प्रयास किया। पिता रामसेवक जीप में बैठ रहा था तभी भीड़ फिर हंगामा करने लगी। स्थिति बिगड़ते देख डीएम ने माइक थामा और अलाउंस कर सब्र का बांध टूटने की बात कह सभी को सचेत हो जाने की बात कही। हाथ में लाठियां लेकर जैसे ही पुलिस भीड़ की तरफ बढ़ी। हंगामा कर रहे लोग भाग खड़े हुए। मृतक के खेत में जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर शव को दफनाया गया। डीएम व एसपी भी गांव पहुंचीं और जायजा लेकर लौट गईं।
सीओ बांगरमऊ की टिप्पणी पर भड़के परिजन
थाने पहुंचे परिजनों से सीओ बांगरमऊ आरपी सिंह ने शव न दफनाने को लेकर परिजनों से टिप्पणी कर दी। सीओ की बात पर परिजन भड़के गए और बने बनाए खेल पर पानी फिर गया। शांत होने की नौबत में पहुंच चुका हंगामा फिर से भड़क गया। इसी बीच थाने मेें बैठे बसपा जिलाध्यक्ष रामबिलास गौतम ने सीओ की गलत टिप्पण्ीा का विरोध करते हुए एएसपी हरदयाल से इसकी शिकायत की।
शव पर भी हुई खूब राजनीति
विनोद हत्याकांड में बवाल की सूचना पर गुरुवार पहले गांव फिर थाने पहुंचे बसपा विधायक राधेलाल रावत ने परिजनों से बोले कि आपकी मांगों को प्रशासन व पुलिस ने मान लिया है। अब शव का अंतिम संस्कार करिए। इसी बीच पूर्व में हसनगंज से विधायकी का चुनाव लड़े नेता ने मांगे पूरी न होने तक शव को न दफनाए जाने की बात कह दी। जिस पर दोनों नेताओं मेें तू-तू-मै-मै हो गई। हालांकि बाद में अपनी बात से पलटते हुए नेता जी विधायक राधेलाल की बात का समर्थन करने लगे।
प्रदर्शनकारी को पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ा
थाने के बाहर सड़क पर प्रदर्शन कर रहे गांव के एक युवक को पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ा और घसीटते हुए थाने लाकर लॉकअप में डाल दिया। पुलिस का उग्र रूप देख भीड़ भी उनके मंसूबों को समझ चुकी थी। जिस पर एक-एक कर प्रदर्शन कर रहे लोग वहां से खिसक लिए।
भीड़ में एसपी बोलीं एसओ को करेंगे सस्पेंड
मांगों को लेकर भीड़ को उग्र देख एसपी नेहा पांडेय ने मामला शांत करने के लिए सभी के बीच एसओ को सस्पेंड करने और सीओ की गलत टिप्पणी पर जांच कर उनका कार्यक्षेत्र बदलने की बात कही। पुलिस पर कार्रवाई की बात सुन भीड़ का गुस्सा कम हो गया। हालांकि भीड़ के बीच मौजूद कुछ लोग मामले की सीबीआई जांच न होने तक शव को न दफनाने की बात कहते रहे।
दूसरे दिन भी मीडिया के सामने नहीं लाए गए आरोपी
विनोद हत्याकांड के खुलासे के दूसरे दिन भी पुलिस आरोपियों को मीडिया के सामने नहीं लाई। इतना ही नहीं परिजनों को भी आरोपियों से मिलाने की बात कह गुमराह किया गया। आरोपियों से मिलने के लिए परिजन कई घंटे थाने में बैठे रहे। एसपी नेहा पांडेय ने बताया कि पूरी घटना की जांच की जा रही है। कहीं से भी लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।