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जेल में मोबाइल फोन, मिलने से सुरक्षा पर उठे सवाल

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उन्नाव। जेल से फोन कर मेरठ के उद्यमी से रंगदारी मांगने और जांच में हाई सिक्योरिटी बैरिक में बंदी के पास से मोबाइल फोन मिलने की घटना ने जेल की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह हाल तब है जब मोबाइल मिलने के पांच दिन पहले ही जिला प्रशासन ने पूरी जेल खंगाली थी। जांच में तीन बंदी रक्षकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जेल अधिकारियों ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। कुछ दिनों से मेरठ के एक उद्यमी से फोन पर रंगदारी मांगी जा रही थी। मेरठ पुलिस ने जांच शुरू की तो मोबाइल की लोकेश उन्नाव जेल पता चली। 31 मार्च को मेरठ पुलिस उन्नाव जेल पहुंची और इसकी जानकारी दी। पूरे जेल की तलाशी कराई गई तो हाई सिक्योरिटी 17 नंबर बैरिक में बंद प्रशासनिक आधार पर मेरठ जेल से तबादला होकर आए एक बंदी के पास से मोबाइल फोन मिला तो सनसनी फैल गई। मालूम हो कि 26 मार्च को ही प्रशासन ने चुनाव के मद्देनजर जेल का जायजा लिया था। हालांकि निरीक्षण में सबकुछ ठीक मिला था। सूत्रों के मुताबिक बैरिक के भीतर मोबाइल फोन मिलने की घटना में जेल अधिकारियों ने तीन संदिग्ध बंदी रक्षकों को चिन्हित किया है। जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि जो मोबाइल मिला था, उसे मेरठ पुलिस को सौंप दिया गया है। साथ ही आईजी व डीआईजी जेल के अलावा डीएम और एसपी को गोपनीय रिपोर्ट भेजी गई है। उन्होंने बताया कि मेरठ पुलिस जेल में फोन में रखने और रंगदारी मांगने का मुकदमा भी दर्ज कराएगी।
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