उन्नाव/आसीवन। जिस युवती की हत्या में दिव्यांग ने 14 माह जेल काटी, वह मंगलवार को जीवित मिली। शव मिलने पर युवक ने उसकी शिनाख्त लापता पत्नी के रूप में की थी। इसके बाद पड़ोसी दिव्यांग के खिलाफ हत्या कर शव फेंकने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने दिव्यांग को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया था। वह अब उच्च न्यायालय से जमानत पर था। पुलिस ने अब दिव्यांग को बेगुनाह मानते हुए कोर्ट को अवगत कराने की बात कही है।
जुराखनखेड़ा निवासी योगेंद्र कुमार अवस्थी की 18 वर्षीय पत्नी श्रद्धा गुप्ता 21 मार्च 2018 को घर से लापता हो गई थी। 2 अप्रैल 2018 को आसीवन थाना क्षेत्र के शेरपुरकला गांव के बाहर नहर के पास एक 18-19 वर्षीय युवती का जला शव मिला था। प्रधान किशनपाल यादव ने अज्ञात लोगों पर हत्या की रिपोर्ट आसीवन थाना में दर्ज कराई थी। शव जला होने से मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई थी। डॉक्टरों ने डीएनए सैंपल सुरक्षित किया था। 27 मई 2018 को मृतका की चूड़ी, कपड़े व फोटो से योगेंद्र ने शव की पहचान पत्नी श्रद्धा गुप्ता के रूप में की। बाद में उसने पड़ोस के दिव्यांग प्रमोद कुमार लोधी पुत्र जगदीश पर हत्या कर शव छिपाने का आरोप लगाया। आसीवन थाना के तत्कालीन विवेचक प्रमोद वर्मा ने 9 जून 2018 को आरोपी प्रमोद कुमार लोधी को गिरफ्तार किया।
कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। इसी दौरान विवेचक का स्थानांतरण होने से विवेचना दरोगा जयशंकर सिंह को मिली। जयशंकर ने 3 सितंबर 2018 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मौजूदा एसओ राजेश सिंह ने दो साल पहले मृत मिली युवती के डीएनए सैंपल का मिलान कराने के लिए माता-पिता का डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा। एक माह पहले आई डीएनए रिपोर्ट मैच न करने पर मामला उलझ गया। पुष्टि हो गई कि शव श्रद्धा का नहीं था। पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की।
उधर, महाराष्ट्र के एक नर्सिंगहोम में नौकरी कर रही श्रद्धा ने एक्सिस बैंक के एटीएम के लिए आवेदन किया। इसमें उसने उन्नाव से बना आधार कार्ड लगा दिया। आधार कार्ड में उन्नाव वाले घर का पता होने से एटीएम उसके घर पहुंचा तो परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों की सूचना पर पुलिस श्रद्धा की तलाश में लग गई। मंगलवार को किसी काम से महाराष्ट्र से ट्रेन द्वारा उन्नाव आ रही श्रद्धा को पुलिस ने कानपुर सेंट्रल से हिरासत में ले लिया। पुलिस लाइन में पत्रकारों से बातचीत में एसपी आनंद कुलकर्णी ने घटना का खुलासा किया।
--
पति की प्रताड़ना पर छोड़ा था घर
पुलिस लाइन में मौजूद श्रद्धा ने बताया कि पति की प्रताड़ना से आजिज हो चुकी थी। वह अपनी मासूम बेटी को छोड़कर इंटर का हिंदी का पेपर देने के बहाने घर से माखी स्थित स्कूल जाने को निकली। पेपर न देकर वह शुक्लागंज पहुंची और किराये का कमरा लेकर रहने लगी। तीन माह बाद वह ट्रेन से मुंबई पहुंची और वहां से पूना जाकर नौकरी की तलाश करने लगी। उसे एक महिला नौकरी दिलाने की बात कह महाराष्ट्र के अहमद नगर लेकर गई। उसने एक नर्सिंगहोम में नौकरी दिला दी। रहने के लिए नर्सिंगहोम में ही उसे हॉस्टल भी मिल गया। तब से वह वहीं रह रही थी। एटीएम कार्ड के लिए उसने उन्नाव के पते का आधार लगा दिया। इस पर उसे पुलिस ने पकड़ लिया। उसे नहीं पता था कि पति ने पड़ोसी को फंसाने के लिए मृत युवती की पहचान उसके रूप में की।
--
पुलिस कोर्ट को बताएगी, प्रमोद निर्दोष
एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि घटना में नामजद प्रमोद निर्दोष निकला है। वह 14 माह जेल में रहने के बाद जेल से जमानत पर बाहर आया है। अब उसे बेगुनाह साबित करने के लिए कोर्ट में 169 की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।