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पहले न्याय, फिर जिंदगी से लड़ी जंग

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उन्नाव। शादी के नाम पर धोखा देकर शारीरिक शोषण, फिर सामूहिक दुष्कर्म के बाद इंसाफ के लिए लड़ रही पीड़िता पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई थी। जलाए जाने के बाद वह 43 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही। शुक्रवार रात 11:40 बजे सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। उसकी ख्वाहिश थी कि जुल्मों की इंतहा करने वालों को वह अपनी आंखों के सामने सजा पाते देखे। इसका जिक्र उसने इलाज के दौरान अपने भाई से किया था। अपनी अंतिम इच्छा पूरी होने से पहले ही वह दुनिया से अलविदा कह गई।
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सितम की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। 23 वर्षीय युवती को गांव के शिवम त्रिवेदी नाम ने प्रेमजाल में फंसाया। शादी का झांसा देकर रायबरेली ले गया। वहां किराये का कमरा लेकर साथ रखा और कई बार दुष्कर्म किया। आरोपी अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देकर काफी दिनों तक शारीरिक शोषण करता रहा। 19 जनवरी 2018 को आरोपी ने रायबरेली सिविल कोर्ट में वैवाहिक अनुबंध पत्र भी बनवाया। फिर एक महीने बाद उसे गांव छोड़ गया। शादी कादबाव बनाने पर जान की धमकी देने लगा।
धमकियों से दहशत में आई पीड़िता को उसके परिवार ने रायबरेली के लालगंज थाना क्षेत्र में उसकी बुआ के यहां भेज दिया। 12 दिसंबर 2018 को शिवम अपने परिवार के ही शुभम त्रिवेदी के साथ रायबरेली पहुंचा। रीति-रिवाज से शादी करने और साथ रखने का भरोसा दिलाकर बाइक में बैठाकर गांव ले आया। यहां दोनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बिहार थाने और रायबरेली के लालगंज थाने के चक्कर काटती रही। आरोपियों के परिवार और राजनीतिक लोगों के दबाव के कारण रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। पीड़िता ने वकील के माध्यम से न्यायालय और महिला आयोग से गुहार लगाई।
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उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष के आदेश पर बिहार थाना पुलिस ने चार मार्च 2019 और रायबरेली के लालगंज थाना पुलिस ने पांच मार्च 2019 को शिवम व उसके साथी शुभम के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी, अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। बिहार थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना रायबरेली के लालगंज थाना स्थानांतरित कर दी। 19 सितंबर 2019 को मुख्य आरोपी शिवम ने रायबरेली सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। वह 30 नवंबर 2019 को जमानत पर जेल से छूटकर आया था। छह दिन बाद पांच दिसंबर 2019 की सुबह चार बजे, गैंग रेप के दोनों आरोपियों सहित कुल पांच लोगों ने पीड़िता को रास्ते में घेर लिया।
उस समय वह अपने मुकदमें की तारीख के सिलसिले में रायबरेली कचहरी वकील से मिलने जा रही थी। बैसवारा (बिहार) रेलवे हाल्ट स्टेशन जाने के लिए वह घर से एक किमी दूर पहुंची थी। तभी आरोपियों ने उस पर मिट्टी का तेल और पेट्रोल डालकर जला दिया। पीड़िता को सुमेरपुर पीएचसी से जिला अस्पताल, फिर लखनऊ सिविल अस्पताल और इसके बाद वहां से दिल्ली के सफलदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दिल्ली में इलाज के दौरान शुक्रवार रात 11:40 बजे पीड़िता ने अंतिम सांस ली। परिवार आहत है कि इंसाफ की इस लड़ाई में उनकी बेटी को मार डाला गया।
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