उन्नाव। जेल में संक्रमण ने पैर पसारे तो कई बंदी-कैदियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। मौजूदा समय में जेल में 1324 बंदी-कैदी निरुद्ध हैं, जबकि जेल में बनी 17 बैरकों में 800 बंदी और कैदियों को रखने की क्षमता है। ऐसे में अब बंदी और कैदियों को संक्रमण का डर सता रहा है। बावजूद इसके संक्रमण के खतरे को देखते हुए कोर्ट के निर्देश पर जेल प्रशासन ने महज 30 सिद्धदोष को पैरोल पर रिहा करने की सूची शासन को भेजी है।
कोराना संक्रमण की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है। रोजाना संक्रमण की चपेट में आकर लोग काल के गाल में समा रहे हैं। संक्रमण के खतरे के बावजूद मारपीट जैसे मामलों में आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है। जिससे जेल में बंदी और कैदियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।
जेल की 17 बैरकों में 800 बंदी और कैदियों को रखने की व्यवस्था है। हालांकि मौजूदा समय में इसके सापेक्ष डेढ़ गुना अधिक 1324 बंदी-कैदी बैरकों में रखे गए हैं। बंदियों की तादात बढ़ने से संक्रमण के पैर पसारने का खतरा बना हुआ है। अप्रैल माह में 50 और मई में 13 लोगों को विभिन्न मामलों में जेल भेजा गया है।
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अस्थायी जेल में 14 दिन रहते क्वारंटीन
जेलर ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि जेल में क्षमता से अधिक बंदी व कैदी हैं। हालांकि जेल में लाने से पहले संक्रमण के खतरे को देखते हुए इन बंदियों को 14 दिन के लिए अस्थायी जेल बक्खाखेड़ा में रखा जाता है।
संक्रमण जेल में पैर न पसारे इसके लिए न्यायालय के आदेश पर 30 कैदियों को पैरोल पर जल्द छोड़ा जाएगा। रिहाई के लिए डीजी जेल आनंद कुमार व जिला सत्र न्यायालय को कैदियों की सूची भेजी गई है। हत्या, दुष्कर्म व डकैती जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल की श्रेणी में नहीं रखा गया है।