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फोटो नंबर-19- दहीचौकी स्थित टेनरी में चमड़ा तैयार करते श्रमिक।
फोटो नंबर-27- टेनरी संचालक ताज आलम।
चमड़ा उद्योग पर भी कोरोना का असर
न केमिकल मिल पा रहे न सजावटी सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। माघ मेला में दो माह की बंदी के बाद उबरने की कोशिश कर रहे चमड़ा उद्योग को कोरोना वायरस चपेट में ले रहा है। औसतन हर महीने दो हजार करोड़ के कारोबार में पच्चीस फीसदी की गिरावट आई है। चीन से केमिकल व अन्य सामग्री नहीं मिल पा रही है।
एनजीटी के आदेश पर लगातार तीन महीने की बंदी के बाद राहत मिली तो दिसंबर और जनवरी महीने में माघ मेला के चलते लगातार बंदी में चमड़ा उद्योग चरमरा गया है। किसी तरह उत्पादन और विदेशी आर्डर पूरे करने की कोशिश कर रहे चर्म उद्योग पर अब कोरोना का कहर शुरू हो गया है। एक महीने में व्यापार में पच्चीस फीसदी की गिरावट आई है। टेनरियां न चलने से चर्म उत्पाद बनाने वाले छोटे उद्योग भी प्रभावित हैं।
टेनरी संचालक व उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ के उन्नाव चेप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम ने बताया कि टेनरियों में चमड़ा तैयार करने में कई तरह के केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इन केमिकल की आपूर्ति चीन से ही होती है। जूते, बेल्ट, कपड़े, सैडलरी आदि में प्रयोग होने वाले बक्कल, इंगलेट सहित अन्य सजावटी सामान आयात करते हैं, फिर उन्हें अपने उत्पाद में लगाकर विभिन्न देशों में निर्यात करते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना की वजह से चाइना सहित कई देशों में हालात खराब हैं। वहां से माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया कि चमड़ा तैयार करने में सोडियम सल्फाइड और सोडियम फार्मेट का प्रयोग होता है। टेनरी संचालक जिसे चीन से खरीद रहे थे। उन्होंने बताया कि पकमैन नाम का केमिकल यूएसए से आता है। लेकिन इस केमिकल का बेस चाइना में तैयार होता है। इससे यूएसए से भी आपूर्ति नहीं मिल पा रही।
इनसेट
वायरस के वजह से हांगकांग का लेदर फेयर रद्द
ताज आलम ने बताया कि कोरोना की वजह से मार्च महीने में हांगकांग होने वाला लेदर फेयर रद्द हो गया है। यह फेयर पूरी दुनिया के लिए कई मिलियन डालर का व्यापार देता था। उन्होंने बताया कि दो साल पहले तक देश में चर्म उत्पादों का निर्यात 7.5 मिलियन डालर था। बंदिशों की वजह से इसमें आधे से भी ज्यादा गिरावट आई है। 2020 की शुरुआत में व्यापार 3.5 मिलियन डालर हो गया। उन्होंने बताया कि भारत में बंदिशों की वजह से चमड़ा उद्योग मर रहा है। समय पर आर्डर पूरे न कर पाने से होने से इसका लाभ पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका आदि देशों को मिला।