उन्नाव। महिला जिला अस्पताल कोमा जैसी स्थिति में है। अब उसे खुद इलाज की जरूरत है। यहां न तो डॉक्टरों के अस्पताल पहुंचने का समय तय है न उनकी अधिकारी का। डॉक्टरों के लिए निर्धारित समय सुबह आठ बजे है। सुबह से महिला मरीज डॉक्टरों के कक्ष के बाहर लाइन लगाए इंतजार करते रहते हैं और डॉक्टर घंटों बाद पहुंचती हैं। शनिवार सुबह अमर उजाला की टीम महिला अस्पताल की हकीकत जानने पहुंची तो बदहाली सामने आई। सुबह 9. 45 बजे महिला अस्पताल में न सीएमएस पहुंची और ना तो कई डॉक्टर अपने ओपीडी कक्ष में थे। ओपीडी रूम के बाहर मरीजों की लंबी लाइनें लगी थीं। डॉक्टरों की लेटलतीफी गर्भवती महिलाओं के लिए किसी सजा से कम नहीं थी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्यालय में लगा ताला
9.17 बजे तक मरीजों की सुविधा के लिए बनाया गया राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना कक्ष बंद था। महिला कार्यालय में भी ताला लटक रहा था। महिला सीएमएस डॉ. सरोज श्रीवास्तव 9.20 बजे तक अस्पताल नहीं पहुंची थीं। उनके कमरे का एसी चल रहा था। उनके कक्ष के बाहर व भीतर कोई कर्मचारी भी नहीं था, ताकि उनके आने या न आने की जानकारी हो सके। सीएमएस के कक्ष के बाहर भी महिला मरीजों की लंबी लाइन जरूर लगी थी। कतार में खड़ी पुलिस लाइन निवासी मधु ने बताया कि वह 8.30 बजे से सीएमएस का इंतजार कर रही हैं लेकिन उनका कुछ पता नहीं है। 9.47 बजे सीएमएस अस्पताल पहुंचीं। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला 9.17 पर खुला था लेकिन यहां तैनात डॉ. विशाल भगत नदारत थे। 9.30 बजे तक नहीं पहुंचे थे।
डॉक्टरों के कक्ष में भी खाली पड़ी थीं कुर्सियां
जिला महिला अस्पताल में जिन महिला डॉक्टरों को ओपीडी के लिए सुबह 8 बजे आ जाना चाहिए था वह सुबह 9.41 तक अपनी सीट से नदारद थीं। डाक्टरों के रूम के बाहर मरीज उनके आने का इंतजार कर रहे थे। सुबह 10 बजे डॉ. रामपति अपने ओपीडी कक्ष पहुंची तो मरीजों की भीड़ लग गई। जबकि महिला डॉक्टरों में अर्चना वर्मा व डॉ. प्रमिला निरंजन सुबह दस बजे तक अपने ओपीडी कक्ष में नहीं पहुंची थीं।
सुबह 9.47 बजे अस्पताल पहुंची सीएमएस ने बताया कि वह इमरजेंसी वार्ड में थीं। उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर किए। उस समय तक रजिस्टर पर डॉ. रमापति और डॉ. अर्चना वर्मा ने ही हस्ताक्षर किए थे। कर्मचारी पीयूष सोनकर सुबह 9.32 पर महिला सीएमएस के कक्ष में पहुंचे और मेज पर रखे उपस्थित रजिस्टर में हस्ताक्षर किए।
बीमार महिला को बिना देखे कर दिया रेफर
शनिवार सुबह 10 बजे बीघापुर के सैदरपुर गांव में रहने वाले अमित अपनी पत्नी संगीता को 108 एंबुलेंस से जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। संगीता गर्भवती है। उसे कई दिनों से बुखार भी आ रहा था। वह पहले प्रसव कक्ष में मौजूद डॉक्टर सीमा श्रीवास्तव के पास पहुंचा तो उन्होंने उसे सीएमएस के पास भेजा। गंभीर स्थिति में वह ओपीडी कर रहीं डॉ. रामपति के पास पहुंचा। उन्होंने मरीज को बिना देखे ही बाहर से सीएमएस के पास भेज दिया। सीएमएस डॉ. सरोज श्रीवास्तव ने जब उसका पर्चा देखा तो भर्ती करने के लिए लिखा। जब वह दोबारा डॉ. सीमा के पास पहुंचा तो उन्होंने संगीता का बीपी हाई होने की बात कहते हुए कानपुर हैलट रेफर कर दिया।
क्या बोलीं जिम्मेदार
-देर से अस्पताल पहुंचने के सवाल पर सीएमएस डॉ. सरोज श्रीवास्तव बताया कि नाइट में ड्यूटी की थी इस कारण आने में देरी हो गई। ओपीडी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के भी न आने का कारण जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि अबतक आ जाना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया कि डॉक्टरों के आने में देर हो जाती है। जो डॉक्टर नहीं आई हैं उनकी अनुपस्थिति चढ़ाई जाएगी और कार्रवाई भी की जाएगी।
- सीएमओ ने डॉ. गीता यादव ने बताया कि अगर डॉक्टर समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं तो यह गैर जिम्मेदाराना रवैया है। वह इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक भेजेंगी।