फोटो-16-जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद।
उन्नाव। गलन भरी भीषण सदी में हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ गया है। जरा सी लापरवाही इनको भारी पड़ रही है। बीते 15 दिन में पांच मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं 20 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार ह्रदयरोगी ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें। सुबह-शाम ठंड में बाहर निकलने से बचें और नियमित दवाइयों का सेवन करें।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि ठंड में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे हृदय पर दबाव बढ़ता है। पहले से हार्ट, बीपी, शुगर या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। कोविड संक्रमण के बाद जिन मरीजों के फेफड़े कमजोर हो गए हैं उनमें सीने में दर्द और सांस फूलने की समस्या तेजी से उभर रही है।
डॉक्टर के अनुसार अस्पताल में कुछ मरीज ऐसे आ रहे हैं जो सामान्य सर्दी-खांसी और सीने में हल्का दर्द होने की समस्या बताते हैं। कई मामलों में जब तक डॉक्टर बीमारी की सही पहचान कर पाते हैं तब तक मरीज की हालत बिगड़ जाती है। उन्होंने बताया कि सीने में दर्द, घबराहट, पसीना आना, सांस फूलना या बाएं हाथ-जबड़े में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और जांच कराएं।
जिला अस्पताल में नहीं हृदय रोग का इलाज
उन्नाव। जिला अस्पताल में दिल के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके पांडेय अगस्त 2023 में सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। ह्रदयरोग विभाग में पहुंचने वाले मरीज मायूस होते हैं। ओपीडी में फिजीशियन रोजाना औसतन 50 मरीज देखते हैं और दवा देते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर मरीजों को सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ईसीजी जांच की सुविधा मिल जाती है। इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले गंभीर ह्रदय रोगियों को कानपुर कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया जाता है।