कोटे के केरोसिन की कालाबाजारी में बड़े स्तर पर खेल शुरू है। नेटवर्क में डीलर, कोटेदार के साथ विभाग के कर्मी भी शामिल हैं। आयल कंपनियों से केरोसिन लेकर डीलर इसे सीधे बाजार में बेच दे रहे हैं। शुक्रवार को डिपो मालिक समेत चार पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि डिपो मालिक फरार है।
सूत्र बताते हैं कि तेल का काला कारोबार कई सालों से फ ल-फ ूल रहा था। इसके अलावा क्षेत्र के कई ऐसे कोटेदार भी हैं जो हर महीने तेल की आपूर्ति तो यहां से उठाते हैं लेकिन उसे गरीब के परिवार तक पहुंचाने से पहले ही बाहर ही सौदा कर देते हैं। सूत्रोें का दावा है कि क्षेत्रीय तेल डिपो के लोगों की सेटिंग विभागीय जिलास्तर अधिकारियों से भी होती है।
मालूम होकि नवाबगंज हाइवे पर स्थित मेसर्स इंडियन पेट्रोलियम के नाम से एक केरोसिन डिपो संचालित है। यहां पर कोटेदारों को दिया जाने वाले केरोसिन का भंडारण किया जाता है। गुरुवार रात एसटीएफ टीम के इंचार्ज हेमंत व एसडीएम हसनगंज मनीष बंसल ने अजगैन पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की थी। जांच के दौरान टीम को स्टाक रजिस्टर में बड़ी हेराफेरी मिली थी। इसमें एक टैंकर 12 हजार लीटर का एडवांस में प्राप्त दिखाया गया।
जबकि असल में उक्त टैंकर की सप्लाई डिपो में आई ही नहीं थी। वहीं क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक ने भी डिपो में भंडारण को बिना जांच के ही स्टाक रजिस्टर में हस्ताक्षर सहित प्रमाणित भी कर दिया था। टैंकर को एसटीएफ की टीम ने कानपुर के बिधनू से गुरूवार दोपहर को बरामद किया था।
टीम ने पूरे गोदाम को सील कर दिया था। शुक्रवार को डीएम अदिति सिंह के आदेश पर क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी जगन्नाथ राणा ने डिपो मालिक कृष्ण कुमार महेश्वरी निवासी मालरोड कानपुर, मुनीम शिवशंकर पुत्र हरिशंकर निवासी नवाबगंज, टैंकर चालक छोटे पुत्र फ ुदतुल्ला निवासी नसीमगंज बांगरमऊ व क्लीनर सफ ीर पुत्र वहीद निवासी नदियासा बांगरमऊ पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हेराफेरी, स्टाक रजिस्टर में गलत इंट्री करने, तेल की कालाबाजारी करने व सरकारी मूल्य से ऊंचे भाव में बेचने का आरोप लगाते हुए अजगैन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।
अजगैन थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि मौके से ड्राइवर, क्लीनर व मुनीम को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि डिपो मालिक की गिरफ्तारी पुलिस अभी नहीं कर पाई है।
क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक की संलिप्तता पाये जाने के बाद बचाव में लगे अधिकारी
तेल भंडारण के स्टाक रजिस्टर में बिना भंडारण जांच के हस्ताक्षर सहित स्टाक प्रमाणित करने के मामले अब विभागीय अधिकारी अपने क्षेत्रीय अधिकारी को बचाने के चक्कर में लगे हैं। जबकि जांच के दौरान क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक की संलिप्तता पाई गई थी। एसटीएफ ने क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक के थाने में बयान भी लिए थे। जिसमें दबी जुबान से उसकी संलिप्तता भी उजागर हुई। इसके बाद भी विभाग के उच्चाधिकारी विभागीय जांच के नाम पर अपने अधिकारी को बचाने के चक्कर में लगे हुए हैं।
कुछ इस तरह होता है खेल
दरअसल, तेल कंपनियां राज्य सरकार द्वारा त्रैमासिक डीलर कोटा लिस्ट के अनुसार केरोसिन देती हैं। इसके लिए आवंटित डिपो पर डीलर अपने कोटे के अनुसार इंडेन्ट तैयार कराता है और अपने अनुबंधित ट्रांसपेार्टर की गाड़ी का नंबर तेल कंपनी डिपो को उपलब्ध कराते हैं। निर्धारित तिथि पर अधिकृत तेल टैंकर डिपो से केरोसिन लेकर जैसे ही निकलता है, ऑटोमेटिक सिस्टम द्वारा डीलर को पूरा विवरण एसएमएस से उपलब्ध हो जाता है।
डीलर इस केरोसिन को पूर्ति अधिकारी द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में अपने स्टॉक में एंट्री करते हैं। सभी संबंधित स्टॉक रजिस्टर पर हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार यह डीलर अपने क्षेत्र के कोटेदारों को निर्धारित मात्रा में केरोसिन निर्गत कर देते हैं।
18 का तेल बाजार में 50 का बिकता
डीलरों को डिपो से केरोसिन 18.10 रुपये प्रति लीटर मिलता है। वह कोटेदार को 18.94 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराता है। खुले बाजार में केरोसिन की कीमत लगभग 50 रुपये प्रति लीटर है। दाम में इतना बड़ा अंतर इस सिस्टम में सेंध लगाकर केरोसिन को ऊंचे दामों पर बेचने का मुख्य कारण है।
तीन स्तरों पर डीलर करते हैं गड़बड़ियां
डीलर तीन स्तरों पर गड़बड़ियां कर रहे हैं। पहला उन्हें तेल कंपनियों से मिलने वाले केरोसिन को 40 से 45 रुपये प्रति लीटर की दर से पूरा का पूरा तेल बेच रहे हैं। दूसरा फर्जी तरीके से इस कोटे को अपने स्टॉक में दर्शाते हैं। इसमें संबंधित सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर प्राप्त करवाते हैं। तीसरा डीलर से जुड़े कोटेदारों को उनके कोटे के एक हिस्से की पूर्ति और शेष के बदले 30 से 35 रुपये प्रति लीटर की दर से भुगतान करते हैं।