एक ओर जहां बढ़ी ठंड से किसानों व व्यापारियों के चेहरे खिल गए हैं। वहीं दूसरी ओर गलन से आम आदमी के हाड़ कांप गए। मकर संक्रांति के बाद बढ़ी ठंड से किसानों में गेहूं की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जग गई है
इस पर किसानों के चेहरों पर खुशी के भाव देखे जा सकते हैं। किसानों का मानना है कि यदि सर्दी निरंतर पड़ती है तो गेहूं की पैदावार को फायदा होगा।
खिल उठे किसानों के चेहरे- शनिवार को अचानक मौसम ने पलटी मारी, जिससे ठंड बढ़ गई। इससे पहले शुक्रवार रात नौ बजे के बाद ही कोहरे का प्रकोप बढ़ गया था। रात 12 बजे कोहरे का आलम यह रहा कि दो मीटर के आगे कुछ नजर नहीं आ रहा था।
शनिवार सूर्योदय होने के साथ ही तेज हवा चलने लगी और आसमान में बादल छाने से धूप नहीं निकली। लोगों को कड़ाके की ठंड का अहसास हुआ। वहीं कोहरे के साथ इस प्रकार की सर्दी देख किसानों के चेहरे खिल उठे।
किसानों का कहना है कि कड़ाके की ठंड न पड़ने से गेहूं के पौधे मुरझाने से लगे थे। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए कड़ाके की ठंड पड़नी चाहिए। जनवरी की शुरुआत में ही तेज धूप और गर्मी होने लगी थी, उससे गेहूं की पैदावार गिरने की आशंका बढ़ गई थी।
जिले में इस बार 244509 हेक्टेअर में गेहूं की बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन मात्र 219390 हेक्टेअर में ही गेहूं की बुवाई हो पाई है। कृषि विभाग ने इस बार 966 हजार मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
20-25 दिन हो ऐसी ठंड तो गेहूं को फायदा- जिला कृषि अधिकारी यतींद्र सिंह की मानें तो इस तरह की ठंड अभी 20 से 25 दिन और पड़नी चाहिए। गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए कड़ाके की ठंड पड़नी बेहद जरूरी है।
वैसे गेहूं की फसल को तैयार होने में लगभग 90 से 100 दिन के बीच का समय लगता है। यदि इतने दिन कड़ाके की ठंड नहीं पड़ेगी तो इसका असर गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है। बताया कि गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना चाहिए।
पिछले साल भी गिरा था गेहूं का उत्पादन- वर्ष 2015 में असमय की ओलावृष्टि व बारिश से गेहूं की पैदावार को तगड़ा नुकसान हुआ था। उस दौरान भी किसानों की फसलें तबाह हुई थीं। गेहूं का उत्पादन गिरकर आधा ही रह गया था।
पिछले वर्ष में लक्ष्य 800 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का था, लेकिन उत्पादन 488 हजार एमटी ही हुआ था, जबकि वर्ष 2014 में मौसम ने साथ देने से 736 हजार मीट्रिक टन गेहूं की बंपर पैदावार हुई थी।