हसनगंज। विकासखंड में तैनात दो पंचायत सचिवों ने चिकित्सीय अवकाश के दौरान नियमों को ताक पर रखकर छह ग्राम पंचायतों को 23 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया। तत्कालीन बीडीओ केएन पांडेय ने एडीओ पंचायत रत्न कुमार से इसकी जांच कराई तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने दोनों पर कार्रवाई और नियमों को ताक पर रखकर किए गए भुगतान की वसूली के लिए पंचायतराज अधिकारी को पत्र भेजा।
ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी रोहित राणा 30 जून व ग्राम विकास अधिकारी संजीव कुमार 23 जून 2020 से चिकित्सीय अवकाश पर गए थे। पंचायतीराज नियमों के तहत, किसी भी प्रकार के अर्जित अवकाश पर होने के बाद कर्मचारी विभागीय भुगतान आदि नहीं कर सकता है। वहीं नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर दूसरे को चार्ज दिया जाता है। हालांकि ब्लाक में तैनात दोनों पंचायत सचिवों के स्थान पर दूसरे को चार्ज नहीं दिया गया जिसका दोनों ने फायदा उठाया और आवंटित तीन, तीन ग्राम पंचायतों से 2363749 रुपये निकालकर कुछ निर्माण कार्यों का भुगतान कर दिया।
वर्तमान खंड विकास अधिकारी पंकज गौतम ने बताया कि दोनों सचिवों ने चिकित्सीय अवकाश में रहने के बाद भी 6 ग्राम पंचायतों से 23 लाख से अधिक का भुगतान प्रधान से मिलकर किया था। इसकी जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए डीपीआरओ के पास भेजी गई।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
चिकित्सीय अवकाश पर रहने के दौरान भुगतान करना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। बीडीओ की रिपोर्ट के आधार पर दोनों पंचायत सचिवों से अनियमित ढंग से भुगतान की गई 23 लाख से अधिक की धनराशि की रिकवरी कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। यदि जांच में प्रधानों की भूमिका भी संदिग्ध होगी तो उन पर कार्रवाई होगी। - राजेंद्र प्रसाद यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी उन्नाव।