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बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया फिर शुरू

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उन्नाव। बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया फिर शुरू की गई है। वन विभाग की 7.5 हेक्टेअर भूमि न मिलने से बाईपास निर्माण शुरू नहीं हो सका था। शासन से मंजूर 43.32 करोड़ रुपये वापस हो गया था। अमर उजाला में मामला उठाए जाने पर अब डीएम ने वन विभाग से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी करने और एक महीने में भूमि खाली कराने के निर्देश दिए हैं।
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हरदोई मार्ग स्थित अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से लखनऊ-कानपुर हाईवे के दही चौकी चौराहा तक 9.5 किलोमीटर लंबा बाईपास मार्ग बनाने के लिए वर्ष 2016 में मंजूरी मिली थी। इसके बनने से रोजाना शहर के भीतर से होकर निकल रहे औसतन तीन हजार भार वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से हो जाता। शहर में जाम और आए दिन होने वाले हादसों पर भी अंकुश लगता। शासन से बाइपास निर्माण के लिए 43.32 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी निर्माण नहीं हो पाया और बजट वापस हो गया।
इसकी वजह यह रही कि मार्ग में पड़ने वाली वन विभाग की 7.5 हेक्टेअर भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया। वन विभाग को इस जमीन के बदले बांगरमऊ तहसील के रानपुर ग्रंट में दूसरी भूमि देने का प्रस्ताव था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद लोकनिर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मन्नीलाल ने प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर 30 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी करके वन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने व पेड़ों की कटान कराकर एक महीने के अंदर भूमि खाली कराई जाए। डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि बाइपास मार्ग निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए दोनों ही विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
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