उन्नाव। जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग की उदासीनता से प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना अपना लक्ष्य तक पूरा नहीं कर पाई। शासन से मिले लक्ष्य के सापेक्ष प्रशासन पशुपालकों को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने में फेल साबित हुआ। 1863 लक्ष्य के सापेक्ष महज 1250 गायें ही दान दी र्गईं।
गोसेवा के प्रति रुचि पैदा करने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना शुरू की थी। योजना के तहत गो आश्रय स्थलों में बंद गोवंशीय को इच्छुक पशुपालकों को दान में देने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए 1863 गोवंश को दान में देने का लक्ष्य भी जारी किया गया था। प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश लेने के इच्छुक पशुपालकों को भरण पोषण के लिए 900 रुपये प्रति माह देने के भी आदेश दिए गए थे। हालांकि प्रशासन की इस योजना के प्रति उदासीनता का फायदा पशुपालन विभाग ने उठाया और पशुपालकों को इसके लिए प्रति जागरूक नहीं किया।
इससे ज्यादा संख्या में लोग गोवंश लेने के लिए आगे नहीं आए। यही वजह है कि लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 1250 गोवंश ही दान में दिए जा सके। गंजमुरादाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, विकासखंड को 148 का लक्ष्य दिया गया था। इसमें महज 38 ही दान में जा सकीं। राजकीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. राहुल सचान ने बताया कि योजना पशुपालकों के लिए लाभदायक है लेकिन प्रक्रिया लंबी है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद पशुपालक को सौ रुपये के हलफ नामे में यह निश्चित करना होता है कि वह कभी भी इस गाय को बेसहारा नहीं छोड़ेगा। ऐसी स्थिति में इस योजना ने दम तोड़ दिया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीके सिंह ने भी माना कि ज्यादातर पशुपालकों ने गाय दान में लेने में रुचि नहीं दिखाई। जिस कारण योजना का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका है।